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कुछ ज़हर भी होता है!
दादा बड़े भोले थे सब से यही कहते थे, कुछ ज़हर भी होता है अंग्रेज़ी दवाओं में| बशीर बद्र
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तारीक ख़लाओं में!
हम चाँद सितारों की राहों के मुसाफ़िर हैं, हम रात चमकते हैं तारीक ख़लाओं में| बशीर बद्र
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पंचवटी पृष्ठ 1
आज मैं हिन्दी साहित्य के एक प्रमुख कवि स्वर्गीय मैथिलीशरण गुप्त जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| यह उनके एक प्रमुख काव्य ‘पंचवटी’ का प्रथम पृष्ठ है| गुप्त जी की अधिक रचनाएं मैंने पहले शेयर नहीं की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय मैथिलीशरण गुप्त जी की यह कविता – पूज्य पिता के…
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फूलों की ख़ताओं में!
मौसम का इशारा है ख़ुश रहने दो बच्चों को, मासूम मोहब्बत है फूलों की ख़ताओं में| बशीर बद्र
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ख़ुशबू सी अदाओं में!
इस शहर में इक लड़की बिल्कुल है ग़ज़ल जैसी, बिजली सी घटाओं में ख़ुशबू सी अदाओं में| बशीर बद्र
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सावन की घटाओं में!
तुम छत पे नहीं आए मैं घर से नहीं निकला, ये चाँद बहुत भटका सावन की घटाओं में| बशीर बद्र
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ख़ुशबू की तरह आया!
ख़ुशबू की तरह आया वो तेज़ हवाओं में, माँगा था जिसे हम ने दिन रात दुआओं में| बशीर बद्र
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मैं तेरे इंतिज़ार में!
तेरी ही जुस्तुजू में लगा है कभी कभी, मैं तेरे इंतिज़ार में हूँ भी नहीं भी हूँ| निदा फ़ाज़ली
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नयनों की रेशम डोरी से!
आज एक बार फिर मैं एक प्रमुख राष्ट्रीय कवि तथा भारत के स्वाधीनता संग्राम और गांधी जी के विषय में अनेक महत्वपूर्ण रचनाएं लिखने वाले स्वर्गीय सोहनलाल द्विवेदी जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| द्विवेदी जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय सोहनलाल द्विवेदी…