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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 11th May 2024

    निगाह को ऐसी रसाई दे!

    देना है तो निगाह को ऐसी रसाई दे, मैं देखूँ आइना तो मुझे तू दिखाई दे| कृष्ण बिहारी नूर 

  • 11th May 2024

    पात नए आ गए!  

    आज एक बार फिर मैं हिन्दी के प्रसिद्ध कवि स्वर्गीय केदारनाथ सिंह जी  का एक नवगीत शेयर कर रहा हूँ| इनकी कविताओं को अज्ञेय जी द्वारा संपादित ‘तीसरा सप्तक’ में भी शामिल किया गया था| इनकी कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत हैं स्वर्गीय केदारनाथ सिंह जी का यह नवगीत…

  • 10th May 2024

    तीरगी ये मत कहो!

    दिल में अपने दर्द की छिटकी हुई है चाँदनी, हर तरफ़ फैली हुई है तीरगी ये मत कहो|    जाँ निसार अख़्तर

  • 10th May 2024

    कुछ कमी ये मत कहो!

    जितने वादे कल थे उतने आज भी मौजूद हैं, उन के वादों में हुई है कुछ कमी ये मत कहो| जाँ निसार अख़्तर

  • 10th May 2024

    आज थक कर रह गया है!

    पाँव इतने तेज़ हैं उठते नज़र आते नहीं, आज थक कर रह गया है आदमी ये मत कहो| जाँ निसार अख़्तर

  • 10th May 2024

    यारो अभी ये मत कहो!

    कट सकी हैं आज तक सोने की ज़ंजीरें कहाँ, हम भी अब आज़ाद हैं यारो अभी ये मत कहो| जाँ निसार अख़्तर

  • 10th May 2024

    महँगाई!  

    आज एक बार फिर मैं हिन्दी के प्रसिद्ध हास्य कवि स्वर्गीय काका हाथरसी जी  की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| इनकी कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत हैं स्वर्गीय काका हाथरसी जी की यह कविता – जन-गण मन के देवता, अब तो आँखें खोलमहँगाई से हो गया, जीवन डाँवाडोलजीवन…

  • 9th May 2024

    दीवानगी ये मत कहो!

    हम से दीवानों के बिन दुनिया सँवरती किस तरह, अक़्ल के आगे है क्या दीवानगी ये मत कहो| जाँ निसार अख़्तर

  • 9th May 2024

    बदन की गुनगुनाहट तो सुनो!

    उस नज़र की उस बदन की गुनगुनाहट तो सुनो, एक सी होती है हर इक रागनी ये मत कहो| जाँ निसार अख़्तर

  • 9th May 2024

    आवारगी ये मत कहो!

    जिस्म की हर बात है आवारगी ये मत कहो, हम भी कर सकते हैं ऐसी शायरी ये मत कहो| जाँ निसार अख़्तर

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