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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 20th Nov 2024

    निभाना भी नहीं आया!

    नहीं कि अपना ज़माना भी तो नहीं आया,हमें किसी से निभाना भी तो नहीं आया| वसीम बरेलवी

  • 20th Nov 2024

    क़िस्सा पुराना चाहता!

    तक़ाज़ा वक़्त का कुछ भी हो ये दिल,वही क़िस्सा पुराना चाहता है| वसीम बरेलवी

  • 20th Nov 2024

    शिकायत का धुआँ!

    शिकायत का धुआँ आँखों से दिल तक,तअ’ल्लुक़ टूट जाना चाहता है| वसीम बरेलवी

  • 20th Nov 2024

    अच्छे बच्चे!

    आज मैं हिन्दी के श्रेष्ठ कवि श्री नरेश सक्सेना जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| नरेश जी की अधिक रचनाएं मैंने पहले शेयर नहीं की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है श्री नरेश सक्सेना जी की यह कविता – कुछ बच्चे बहुत अच्छे होते हैंवे गेंद और ग़ुब्बारे नहीं मांगतेमिठाई नहीं मांगते ज़िद नहीं…

  • 19th Nov 2024

    क़लम करना कहाँ है!

    क़लम करना कहाँ है उस का मंशा, वो मेरा सर झुकाना चाहता है| वसीम बरेलवी

  • 19th Nov 2024

    मैं उस को ही चाहूँ!

    मुझे देखो कि मैं उस को ही चाहूँ,जिसे सारा ज़माना चाहता है| वसीम बरेलवी

  • 19th Nov 2024

    क्या बताना चाहता है!

    वो मुझ को क्या बताना चाहता है,जो दुनिया से छुपाना चाहता है| वसीम बरेलवी

  • 19th Nov 2024

    उन सियाह बालों में!

    जैसे आधी शब के बा’द चाँद नींद में चौंके,वो गुलाब की जुम्बिश उन सियाह बालों में| बशीर बद्र

  • 19th Nov 2024

    खो गए उजालों में!

    मेरी आँख के तारे अब न देख पाओगे,रात के मुसाफ़िर थे खो गए उजालों में| बशीर बद्र

  • 19th Nov 2024

    फूल के प्यालों में!

    यूँ किसी की आँखों में सुब्ह तक अभी थे हम,जिस तरह रहे शबनम फूल के प्यालों में| बशीर बद्र

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