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आगे गहन अन्धेरा है!
आज मैं विख्यात हिन्दी कवि स्वर्गीय नेमिचन्द्र जैन जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| नेमिचन्द्र जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय नेमिचन्द्र जैन जी की यह कविता – आगे गहन अन्धेरा है, मन रुक-रुक जाता है एकाकीअब भी है टूटे प्राणों में किस छबि…
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झुका दरख़्त हवा से!
झुका दरख़्त हवा से तो आँधियों ने कहा,ज़ियादा फ़र्क़ नहीं झुकने टूट जाने में| जावेद अख़्तर
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गँवा दिया उसे हमने!
लतीफ़ था वो तख़य्युल से ख़्वाब से नाज़ुक,गँवा दिया उसे हम ने ही आज़माने में| जावेद अख़्तर