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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 26th Nov 2024

    कि हम ने देर लगा दी!

    जो मुंतज़िर न मिला वो तो हम हैं शर्मिंदा, कि हम ने देर लगा दी पलट के आने में| जावेद अख़्तर

  • 26th Nov 2024

    ज़िंदगी ज़ुल्फ़ तिरी!

    न तो दम लेती है तू और न हवा थमती है,ज़िंदगी ज़ुल्फ़ तिरी कोई सँवारे कैसे| जावेद अख़्तर

  • 26th Nov 2024

    राख में फिर ये !

    दिल बुझा जितने थे अरमान सभी ख़ाक हुए,राख में फिर ये चमकते हैं शरारे कैसे| जावेद अख़्तर

  • 26th Nov 2024

    आज के बिछुड़े न जाने कब मिलेंगे!

    आज मैं विख्यात हिन्दी गीतकार स्वर्गीय नरेंद्र शर्मा जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ| नरेंद्र शर्मा जी ने फिल्मों के लिए भी बहुत से गीत लिखे हैं, उनकी अधिक रचनाएं मैंने पहले शेयर नहीं की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय नरेंद्र शर्मा जी का यह गीत  –  आज के बिछुड़े न जाने…

  • 25th Nov 2024

    पुकारे तो पुकारे कैसे!

    हर तरफ़ शोर उसी नाम का है दुनिया में,कोई उस को जो पुकारे तो पुकारे कैसे| जावेद अख़्तर

  • 25th Nov 2024

    क्या जाने सितारे कैसे!

    हाथ को हाथ नहीं सूझे वो तारीकी थी,आ गए हाथ में क्या जाने सितारे कैसे| जावेद अख़्तर

  • 25th Nov 2024

    कोई उम्र गुज़ारे कैसे!

    हम ने ढूँडें भी तो ढूँडें हैं सहारे कैसे,इन सराबों पे कोई उम्र गुज़ारे कैसे| जावेद अख़्तर

  • 25th Nov 2024

    अजीब बात हुई है!

    वो शक्ल पिघली तो हर शय में ढल गई जैसे,अजीब बात हुई है उसे भुलाने में| जावेद अख़्तर

  • 25th Nov 2024

    कि सारे खोने के ग़म!

    मिसाल इस की कहाँ है कोई ज़माने में,कि सारे खोने के ग़म पाए हम ने पाने में| जावेद अख़्तर

  • 25th Nov 2024

    वही है का’बे में!

    नज़र के ज़ाविए बदले है और कुछ भी नहीं,वही है का’बे में जो ‘नूर’ सोमनाथ में है| कृष्ण बिहारी नूर

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