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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 1st Dec 2024

    ख़ामुशी अच्छी नहीं!

    ख़ामुशी अच्छी नहीं इंकार होना चाहिए, ये तमाशा अब सर-ए-बाज़ार होना चाहिए| ज़फ़र इक़बाल

  • 1st Dec 2024

    नानी!

    आज मैं श्रेष्ठ हिन्दी कवि श्री प्रयाग शुक्ल जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ|   शुक्ल जी की रचनाएं मैंने पहले शेयर नहीं की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है श्री प्रयाग शुक्ल जी की यह कविता –  मेरी बेटी ने नहीं देखा मेरी नानी को ।(नानी की कोई तस्वीर भी नहीं है मेरे…

  • 30th Nov 2024

    मंज़िल ने दिए ताने!

    मंज़िल ने दिए ताने रस्ते भी हँसे लेकिन, चलते रहे अक्सर हम कुछ और तरह से भी| हस्तीमल हस्ती

  • 30th Nov 2024

    जलता है किसी का ग़म!

    शो’ला भी नहीं उठता काजल भी नहीं बनता,जलता है किसी का ग़म कुछ और तरह से भी| हस्तीमल हस्ती

  • 30th Nov 2024

    आँखें हैं हमारी नम !

    इस बार मिले हैं ग़म कुछ और तरह से भी,आँखें हैं हमारी नम कुछ और तरह से भी| हस्तीमल हस्ती

  • 30th Nov 2024

    मैं लखनऊ हो जाऊँ!

    नए मिज़ाज के शहरों में जी नहीं लगता,पुराने वक़्तों का फिर से मैं लखनऊ हो जाऊँ| मुनव्वर राना

  • 30th Nov 2024

    अगर मैं ज़ख़्म की!

    कमी ज़रा सी भी मुझ में न कोई रह जाए,अगर मैं ज़ख़्म की सूरत हूँ तो रफ़ू हो जाऊँ| मुनव्वर राना

  • 30th Nov 2024

    मैं भी सुर्ख़-रू हो जाऊँ!

    मिरी हथेली पे होंटों से ऐसी मोहर लगा,कि उम्र-भर के लिए मैं भी सुर्ख़-रू हो जाऊँ| मुनव्वर राना

  • 30th Nov 2024

    वीरानियाँ हों ख़त्म मिरी!

    किसी तरह भी ये वीरानियाँ हों ख़त्म मिरी,शराब-ख़ाने के अंदर की हाव-हू जाऊँ| मुनव्वर राना

  • 30th Nov 2024

    कभी जब याद आ जाते!

    आज मैं हिंदी  साहित्य के श्रेष्ठ आलोचक तथा हिन्दी कवि स्वर्गीय नामवर सिंह जी का एक नवगीत  शेयर कर रहा हूँ|   नामवर जी की अधिक रचनाएं मैंने पहले शेयर नहीं की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय नामवर सिंह जी का यह नवगीत –  कभी जब याद आ जाते नयन को घेर लेते घन,स्वयं…

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