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काट गिराया लोगों ने!
तेरी लटों में सो लेते थे बे-घर आशिक़ बे-घर लोग, बूढ़े बरगद आज तुझे भी काट गिराया लोगों ने| कैफ़ भोपाली
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ऐब लगाया लोगों ने!
तेरी गली में आ निकले थे दोश हमारा इतना था, पत्थर मारे तोहमत बाँधी ऐब लगाया लोगों ने| कैफ़ भोपाली
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डूबते सितारों के नाम-१
आज एक बार मैंहिन्दी श्रेष्ठ नवगीतकार स्वर्गीय रमेश रंजक जी का एक नवगीत शेयर कर रहा हूँ| यह नवगीत गीत की नई और पुरानी पीढ़ियों के अंतरसंबंधों को लेकर कहा जा सकता है| रंजक जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| आज प्रस्तुत है स्वर्गीय रमेश रंजक जी का यह नवगीत- …
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देस छुड़ाया लोगों ने!
हम को दिवाना जान के क्या क्या ज़ुल्म न ढाया लोगों ने, दीन छुड़ाया धर्म छुड़ाया देस छुड़ाया लोगों ने| कैफ़ भोपाली
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वो नज़र है क्या करूँ
‘कैफ़’ का दिल ‘कैफ़’ का दिल है मगर, वो नज़र फिर वो नज़र है क्या करूँ| कैफ़ भोपाली
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जिस्म पर बाक़ी ये!
जिस्म पर बाक़ी ये सर है क्या करूँ, दस्त-ए-क़ातिल बे-हुनर है क्या करूँ| कैफ़ भोपाली