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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 14th Jun 2024

    काट गिराया लोगों ने!

    तेरी लटों में सो लेते थे बे-घर आशिक़ बे-घर लोग, बूढ़े बरगद आज तुझे भी काट गिराया लोगों ने| कैफ़ भोपाली

  • 14th Jun 2024

    ऐब लगाया लोगों ने!

    तेरी गली में आ निकले थे दोश हमारा इतना था, पत्थर मारे तोहमत बाँधी ऐब लगाया लोगों ने| कैफ़ भोपाली

  • 14th Jun 2024

    डूबते सितारों के नाम-१

    आज एक बार मैंहिन्दी श्रेष्ठ नवगीतकार स्वर्गीय रमेश रंजक जी का एक नवगीत शेयर कर रहा हूँ| यह नवगीत गीत की नई और पुरानी पीढ़ियों के अंतरसंबंधों को लेकर कहा जा सकता है| रंजक जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| आज प्रस्तुत है स्वर्गीय रमेश रंजक जी का यह नवगीत-  …

  • 13th Jun 2024

    देस छुड़ाया लोगों ने!

    हम को दिवाना जान के क्या क्या ज़ुल्म न ढाया लोगों ने, दीन छुड़ाया धर्म छुड़ाया देस छुड़ाया लोगों ने| कैफ़ भोपाली

  • 13th Jun 2024

    एक नूरानी किताब!

    ‘कैफ़’ में हूँ एक नूरानी किताब, पढ़ने वाला कम-नज़र है क्या करूँ| कैफ़ भोपाली

  • 13th Jun 2024

    वो नज़र है क्या करूँ

    ‘कैफ़’ का दिल ‘कैफ़’ का दिल है मगर, वो नज़र फिर वो नज़र है क्या करूँ| कैफ़ भोपाली

  • 13th Jun 2024

    पाँव में ज़ंजीर काँटे!

    पाँव में ज़ंजीर काँटे आबले, और फिर हुक्म-ए-सफ़र है क्या करूँ| कैफ़ भोपाली

  • 13th Jun 2024

    मेरी चाहत में कसर!

    वो तो सौ सौ मर्तबा चाहें मुझे, मेरी चाहत में कसर है क्या करूँ| कैफ़ भोपाली

  • 13th Jun 2024

    शहर में इनका भी!

    चाहता हूँ फूँक दूँ इस शहर को, शहर में इन का भी घर है क्या करूँ| कैफ़ भोपाली

  • 13th Jun 2024

    जिस्म पर बाक़ी ये!

    जिस्म पर बाक़ी ये सर है क्या करूँ, दस्त-ए-क़ातिल बे-हुनर है क्या करूँ| कैफ़ भोपाली

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