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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 17th Dec 2024

    ख़ुद को फ़रेब दो!

    ख़ुद को फ़रेब दो कि न हो तल्ख़ ज़िंदगी,हर संग-दिल को जान-ए-वफ़ा कह लिया करो| क़तील शिफ़ाई

  • 17th Dec 2024

    हर बे-ज़बाँ को!

    हर बे-ज़बाँ को शोला-नवा कह लिया करो,यारो सुकूत ही को सदा कह लिया करो| क़तील शिफ़ाई

  • 17th Dec 2024

    ग़म-ख़्वार तुम्हारे!

    तज दिया तुम ने दर-ए-यार भी उकता के ‘फ़राज़’,अब कहाँ ढूँढने ग़म-ख़्वार तुम्हारे जाएँ| अहमद फ़राज़

  • 17th Dec 2024

    जी जान से हारे जाएँ!

    हम कि नादान जुआरी हैं सभी जानते हैं,दिल की बाज़ी हो तो जी जान से हारे जाएँ| अहमद फ़राज़

  • 17th Dec 2024

    दुल्हन को सँवारे जाएँ!

    बाप लर्ज़ां है कि पहुँची नहीं बारात अब तक,और हम-जोलियाँ दुल्हन को सँवारे जाएँ| अहमद फ़राज़

  • 17th Dec 2024

    उस को पुकारे जाएँ!

    वो जो मौजूद नहीं उस की मदद चाहते हैं,वो जो सुनता ही नहीं उस को पुकारे जाएँ| अहमद फ़राज़

  • 17th Dec 2024

    नए लोग उतारे जाएँ!

    अब ज़मीं पर कोई गौतम न मोहम्मद न मसीह,आसमानों से नए लोग उतारे जाएँ| अहमद फ़राज़

  • 17th Dec 2024

    इतना प्यार न देना मुझको!

    आज मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि स्वर्गीय मधुर शास्त्री जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ। मधुर शास्त्री जी की अधिक रचनाएं मैंने पहले शेयर नहीं की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय मधुर शास्त्री जी का यह गीत – इतना प्यार न देना मुझको दुःख के बोल न मैं सुन पाऊँ यों मेरे जीवन…

  • 16th Dec 2024

    यूँही मर मर के जिएँ!

    यूँही मर मर के जिएँ वक़्त गुज़ारे जाएँ,ज़िंदगी हम तिरे हाथों से न मारे जाएँ| अहमद फ़राज़

  • 16th Dec 2024

    सिलसिला टूटा नहीं है!

    जिस को भी चाहा उसे शिद्दत से चाहा है ‘फ़राज़’,सिलसिला टूटा नहीं है दर्द की ज़ंजीर का| अहमद फ़राज़

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