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इच्छा शक्ति!
आज एक बार मैं प्रसिद्ध हिन्दी व्यंग्य कवि और श्रेष्ठ मंच संचालक श्री अशोक चक्रधर जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| चक्रधर जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| आज प्रस्तुत है श्री अशोक चक्रधर जी की यह कविता- ओ ठोकर !तू सोच रहीमैं बैठ जाऊंगीरोकर,भ्रम है तेराचल दूंगी मैंफ़ौरनतत्पर…
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रुस्वा हो सा जाता हूँ!
तुझे बाँहों में भर लेने की ख़्वाहिश यूँ उभरती है, कि मैं अपनी नज़र में आप रुस्वा हो सा जाता हूँ| जाँ निसार अख़्तर
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मैं प्यासा और प्यासा!
तिरे गुल-रंग होंटों से दहकती ज़िंदगी पी कर, मैं प्यासा और प्यासा और प्यासा हो सा जाता हूँ| जाँ निसार अख़्तर