Skip to content

SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
    • Activity
    • Members
    • Sample Page
    • Sample Page
    • Sample Page
    • About
    • Contact
  • 18th Jun 2024

    समझा तिरी सवारी है!

    इक महक सम्त-ए-दिल से आई थी, मैं ये समझा तिरी सवारी है| जौन एलिया

  • 18th Jun 2024

    उसकी यादगारी है!

    हिज्र हो या विसाल हो कुछ हो, हम हैं और उस की यादगारी है| जौन एलिया

  • 18th Jun 2024

    तेरी इंतिज़ारी है!

    उस से कहियो कि दिल की गलियों में, रात दिन तेरी इंतिज़ारी है| जौन एलिया

  • 18th Jun 2024

    मिरी नींद भी तुम्हारी है

    बिन तुम्हारे कभी नहीं आई, क्या मिरी नींद भी तुम्हारी है| जौन एलिया

  • 18th Jun 2024

    अपना साया भी!

    निघरे क्या हुए कि लोगों पर, अपना साया भी अब तो भारी है| जौन एलिया

  • 18th Jun 2024

    वो ज़िंदगी गुज़ारी है!

    जो गुज़ारी न जा सकी हम से, हम ने वो ज़िंदगी गुज़ारी है| जौन एलिया

  • 18th Jun 2024

    फ़िराक़ तारी है!

    बे-क़रारी सी बे-क़रारी है, वस्ल है और फ़िराक़ तारी है| जौन एलिया

  • 18th Jun 2024

    इच्छा शक्ति!

    आज एक बार मैं प्रसिद्ध हिन्दी व्यंग्य कवि और श्रेष्ठ मंच संचालक श्री अशोक चक्रधर जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| चक्रधर जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| आज प्रस्तुत है श्री अशोक चक्रधर जी की यह कविता-   ओ ठोकर !तू सोच रहीमैं बैठ जाऊंगीरोकर,भ्रम है तेराचल दूंगी मैंफ़ौरनतत्पर…

  • 17th Jun 2024

    रुस्वा हो सा जाता हूँ!

    तुझे बाँहों में भर लेने की ख़्वाहिश यूँ उभरती है, कि मैं अपनी नज़र में आप रुस्वा हो सा जाता हूँ|    जाँ निसार अख़्तर

  • 17th Jun 2024

    मैं प्यासा और प्यासा!

    तिरे गुल-रंग होंटों से दहकती ज़िंदगी पी कर, मैं प्यासा और प्यासा और प्यासा हो सा जाता हूँ| जाँ निसार अख़्तर

←Previous Page
1 … 538 539 540 541 542 … 1,394
Next Page→

Blog at WordPress.com.

Privacy & Cookies: This site uses cookies. By continuing to use this website, you agree to their use.
To find out more, including how to control cookies, see here: Cookie Policy
  • Subscribe Subscribed
    • SamaySakshi
    • Join 1,143 other subscribers.
    • Already have a WordPress.com account? Log in now.
    • SamaySakshi
    • Subscribe Subscribed
    • Sign up
    • Log in
    • Report this content
    • View site in Reader
    • Manage subscriptions
    • Collapse this bar