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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 24th Dec 2024

    आसमाँ पर एक तारा!

    और कुछ पल उस का रस्ता देख लूँ,आसमाँ पर एक तारा और है। परवीन शाकिर

  • 24th Dec 2024

    फाँसी पर टंग गया आकाश!

    आज मैं श्रेष्ठ व्यंग्यकार और हिंदी कवि स्वर्गीय रवींद्रनाथ त्यागी जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ। त्यागी जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय रवींद्रनाथ त्यागी जी की यह कविता   – फाँसी पर टंग गया आकाशसमुद्र अपने ही भँवर में डूब गयाखाइयों में से निकलकर…

  • 23rd Dec 2024

    अब के नज़ारा और है!

    देर से पलकें नहीं झपकीं मिरी,पेश-ए-जाँ अब के नज़ारा और है। परवीन शाकिर

  • 23rd Dec 2024

    फ़स्ल-ए-ग़म का!

    सुख के मौसम उँगलियों पर गिन लिए,फ़स्ल-ए-ग़म का गोश्वारा और है। परवीन शाकिर

  • 23rd Dec 2024

    हारने में इक अना की!

    हारने में इक अना की बात थी,जीत जाने में ख़सारा और है। परवीन शाकिर

  • 23rd Dec 2024

    तेज़ बारिश का सहारा!

    धूप में दीवार ही काम आएगी,तेज़ बारिश का सहारा और है। परवीन शाकिर

  • 23rd Dec 2024

    पुरानी पोस्ट, फिर से

  • 22nd Dec 2024

    आसमाँ का ही इशारा!

    साथ तो मेरा ज़मीं देती मगर,आसमाँ का ही इशारा और है। परवीन शाकिर

  • 22nd Dec 2024

    तीर सीने में उतारा!

    जंग का हथियार तय कुछ और था,तीर सीने में उतारा और है। परवीन शाकिर

  • 22nd Dec 2024

    और धारा और है!

    मौज के मुड़ने में कितनी देर है,नाव डाली और धारा और है। परवीन शाकिर

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