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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 22nd Jun 2024

    जो हो सके तो चला आ

    फ़ज़ा उदास है रुत मुज़्महिल है मैं चुप हूँ, जो हो सके तो चला आ किसी की ख़ातिर तू| अहमद फ़राज़ 

  • 22nd Jun 2024

    ये हर मक़ाम पे!

    हँसी-ख़ुशी से बिछड़ जा अगर बिछड़ना है, ये हर मक़ाम पे क्या सोचता है आख़िर तू| अहमद फ़राज़ 

  • 22nd Jun 2024

    दुनिया तुझे बदल देगी

    मैं जानता हूँ कि दुनिया तुझे बदल देगी, मैं मानता हूँ कि ऐसा नहीं ब-ज़ाहिर तू| अहमद फ़राज़ 

  • 22nd Jun 2024

    तिरा ख़याल कि!

    मिरी मिसाल कि इक नख़्ल-ए-ख़ुश्क-ए-सहरा हूँ, तिरा ख़याल कि शाख़-ए-चमन का ताइर तू | अहमद फ़राज़ 

  • 22nd Jun 2024

    हुई है शाम तो!

    हुई है शाम तो आँखों में बस गया फिर तू, कहाँ गया है मिरे शहर के मुसाफ़िर तू| अहमद फ़राज़ 

  • 22nd Jun 2024

    दिल्लियाँ!

    आज एक बार मैं विख्यात हिन्दी कवि स्वर्गीय शलभ श्रीराम सिंह जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ|  इनकी बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| आज प्रस्तुत है स्वर्गीय शलभ श्रीराम सिंह जी की यह कविता-    हाथी की नंगी पीठ परघुमाया गया दाराशिकोह को गली-गलीऔर दिल्ली चुप रही लोहू की…

  • 21st Jun 2024

    आइना देखा करो!

    तैश में आने लगे तुम तो मिरी तन्क़ीद पर, इस क़दर हस्सास हो तो आइना देखा करो| मंज़र भोपाली

  • 21st Jun 2024

    ईमान का सौदा करो!

    रहनुमा ये दर्स हम को दे रहे हैं आज-कल, बेच दो सच्चाइयाँ ईमान का सौदा करो| मंज़र भोपाली

  • 21st Jun 2024

    हादसों का ख़ौफ़ ले!

    ज़िंदगी के नाम-लेवा मौत से डरते नहीं, हादसों का ख़ौफ़ ले कर घर से मत निकला करो| मंज़र भोपाली

  • 21st Jun 2024

    फूल कहते हैं तुम्हें!

    ख़ुद को पोशीदा न रक्खो बंद कलियों की तरह, फूल कहते हैं तुम्हें सब लोग तो महका करो| मंज़र भोपाली

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