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मेरे नशे में चूर नहीं!
वो कौन सी सुब्हें हैं जिन में बेदार नहीं अफ़्सूँ तेरा, वो कौन सी काली रातें हैं जो मेरे नशे में चूर नहीं| मजरूह सुल्तानपुरी
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ख़याली हूर नहीं!
जन्नत ब-निगह तसनीम ब-लब अंदाज़ उस के ऐ शैख़ न पूछ, मैं जिस से मोहब्बत करता हूँ इंसाँ है ख़याली हूर नहीं| मजरूह सुल्तानपुरी
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बज़्म का ये दस्तूर नहीं
महफ़िल-ए-अहल-ए-दिल है यहाँ हम सब मय-कश हम सब साक़ी, तफ़रीक़ करें इंसानों में इस बज़्म का ये दस्तूर नहीं| मजरूह सुल्तानपुरी
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श्रीकृष्ण शर्मा ‘अशेष’ की रचनायें-1
आत्मविज्ञापन का समय है, कवियों के भी टोले बने हुए हैं, ऐसे में अपना ढोल अपने आप ही बजाना पड़ता है| मैंने काफी पहले अपनी कुछ रचनाएं शेयर की थीं, एक बार फिर से उनको उसी क्रम में शेयर कर रहा हूँ| मैं चाहता हूँ कि अपनी रचनाएं, जितनी उपलब्ध हैं, और याद आ रही…
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इतना तो कोई मजबूर!
तक़दीर का शिकवा बे-मअ’नी जीना ही तुझे मंज़ूर नहीं, आप अपना मुक़द्दर बन न सके इतना तो कोई मजबूर नहीं| मजरूह सुल्तानपुरी
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अंबानी परिवार और ईर्ष्यालु पत्रकार
लीजिए अनंत अंबानी और राधिका की शादी भी निपट गई, वास्तव में देश-विदेश में यह एक बहुत बड़ा ईवेंट था। राहुल गांधी अंबानी-अडानी का जाप इतना ज्यादा कर चुके थे कि इसके बाद उनका इस शादी में शामिल होना बनता ही नहीं था, बाकी तो कौन शामिल नहीं हुआ जी, अगर उनको निमंत्रण मिला था…
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अवकाश, इस बार का
बहुत सी बार जब मैं चार-पाँच दिन के लिए गोवा से बाहर जाता हूँ और लगता है कि ब्लॉगिंग के लिए वहाँ समय नहीं मिल पाएगा, तब मैं नियोजित अवकाश की घोषणा कर देता हूँ। इस बार ऐसा हुआ कि लैपटॉप ने ही धोखा दे दिया और कुछ दिन तक मैं ब्लॉगिंग से दूर रहा…
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मातृभूमि!
आज एक बार फिर मैं हमारे एक प्रमुख राष्ट्रीय कवि स्वर्गीय सोहन लाल द्विवेदी जी की एक प्रसिद्ध कविता शेयर कर रहा हूँ| इनकी अनेक रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय सोहन लाल द्विवेदी जी की यह कविता- ऊँचा खड़ा हिमालयआकाश चूमता है,नीचे चरण तले झुक,नित सिंधु झूमता है।…
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उम्र-सफ़र जारी है!
उम्र-सफ़र जारी है बस ये खेल देखने को, रूह बदन का बोझ कहाँ तक कब तक ढोती है| शहरयार
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कोई क़ीमती चीज़!
ख़ुद को तसल्ली देना कितना मुश्किल होता है, कोई क़ीमती चीज़ अचानक जब भी खोती है| शहरयार