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तिरे एहसास की ईंटें!
तिरे एहसास की ईंटें लगी हैं इस इमारत में, हमारा घर तिरे घर से कभी ऊँचा नहीं होगा| मुनव्वर राना
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ये ख़ून-ए-मुफ़्लिस है!
शेयर-बाज़ार में क़ीमत उछलती गिरती रहती है, मगर ये ख़ून-ए-मुफ़्लिस है कभी महँगा नहीं होगा| मुनव्वर राना
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ये दरवेशों की बस्ती है
ये दरवेशों की बस्ती है यहाँ ऐसा नहीं होगा, लिबास-ए-ज़िंदगी फट जाएगा मैला नहीं होगा| मुनव्वर राना
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मैं उम्र की चौखट पे!
तू ने जो सज़ा दी थी जवानी के दिनों में, मैं उम्र की चौखट पे खड़ा काट रहा हूँ| मुनव्वर राना
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लेकिन मैं इशारे से!
अब आप की मर्ज़ी है इसे जो भी समझिए, लेकिन मैं इशारे से हवा काट रहा हूँ| मुनव्वर राना
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श्रीकृष्ण शर्मा ‘अशेष’ की रचनायें-13
मेरी उपलब्ध रचनाएं यहाँ शेयर करने का आज तेरहवां दिन है, इस प्रकार जहाँ इन सबको, जितनी उपलब्ध हैं, एक साथ शेयर कर लूंगा। इसके लिए मैं अपनी ब्लॉग पोस्ट्स में जिस क्रम में कविताएं पहले शेयर की हैं, उसी क्रम में उनको लेकर यहाँ पुनः एक साथ शेयर कर रहा हूँ। जैसा मैंने पहले…
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क़िस्मत का लिखा !
दुनिया मिरे सज्दे को इबादत न समझना, पेशानी पे क़िस्मत का लिखा काट रहा हूँ| मुनव्वर राना
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मैं सज़ा काट रहा हूँ!
ये बात मुझे देर से मा’लूम हुई है, ज़िंदाँ है ये दुनिया मैं सज़ा काट रहा हूँ| मुनव्वर राना
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ख़ुद अपने ही हाथों का लिखा!
ख़ुद अपने ही हाथों का लिखा काट रहा हूँ, ले देख ले दुनिया मैं पता काट रहा हूँ| मुनव्वर राना
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तलवार छीन लाए हैं!
मिरे क़बीले के बच्चों के खेल भी हैं अजीब, किसी सिपाही की तलवार छीन लाए हैं| राहत इंदौरी