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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 17th Aug 2024

    हथेली रेशमी नाज़ुक!

    हथेली रेशमी नाज़ुक मलाई नर्म लतीफ़, हसीन मरमरीं संदल सफ़ेद दूध धुली| शहज़ाद क़ैस

  • 17th Aug 2024

    आम टाटरी इमली!

    किसी की तुर्श-रुई का सबब यही तो नहीं, अचार लेमूँ अनार आम टाटरी इमली| शहज़ाद क़ैस

  • 17th Aug 2024

    शरीर शोशा शरारा!

    ये जाम छलका कि आँचल बहार का ढलका, शरीर शोशा शरारा शबाब शर शोख़ी| शहज़ाद क़ैस

  • 17th Aug 2024

    भूल गया घर-आँगन!

    आज एक बार फिर मैं श्रेष्ठ साहित्यकार एवं कवि श्री रामदरश मिश्र जी की एक ग़ज़ल शेयर कर रहा हूँ|श्री रामदरश जी की अनेक रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए प्रस्तुत है श्री रामदरश मिश्र जी की यह ग़ज़ल – भूल गया घर-आँगन यादों से बाहर बाज़ार हुआआज बहुत दिन बाद बेख़ुदी में…

  • 16th Aug 2024

    गुलाब रानी कँवल!

    किसी का भीगा बदन गुल खिलाता है अक्सर, गुलाब रानी कँवल यासमीन चम्पा-कली| शहज़ाद क़ैस

  • 16th Aug 2024

    थकन शराब दवा !

    किसी की मध-भरी आँखों के आगे कुछ भी नहीं, थकन शराब दवा ग़म ख़ुमार नीम-शबी| शहज़ाद क़ैस

  • 16th Aug 2024

    ग़ज़ाल मोरनी मौजें!

    किसी को चलता हुआ देख लें तो चलते बनें, ग़ज़ाल मोरनी मौजें नुजूम अब्र घड़ी| शहज़ाद क़ैस

  • 16th Aug 2024

    चराग़ जुगनू शरर!

    किसी के नूर को चुँधिया के देखें हैरत से, चराग़ जुगनू शरर आफ़्ताब फूल-झड़ी| शहज़ाद क़ैस

  • 16th Aug 2024

    किसी के शीरीं-लबों!

    किसी के शीरीं-लबों से उधार लेते हैं, मिठास शहद रुतब चीनी क़ंद मिस्री डली| शहज़ाद क़ैस

  • 16th Aug 2024

    घटा बहार धनक!

    किसी के मरमरीं आईने में नुमायाँ हैं, घटा बहार धनक चाँद फूल दीप कली| शहज़ाद क़ैस

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