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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 20th Aug 2024

    ख़ामोश मोहब्बत का!

    हर चीज़ ज़माने की आईना-ए-दिल होती, ख़ामोश मोहब्बत का इतना तो सिला होता| साग़र सिद्दीक़ी

  • 20th Aug 2024

    मैं भी तिरे गुलशन में!

    कलियों की महक होता तारों की ज़िया होता, मैं भी तिरे गुलशन में फूलों का ख़ुदा होता| साग़र सिद्दीक़ी

  • 20th Aug 2024

    मेरा ख़याल वक़्त की!

    देखी जो रक़्स करती हुई मौज-ए-ज़िंदगी, मेरा ख़याल वक़्त की शहनाई बन गया| साग़र सिद्दीक़ी

  • 20th Aug 2024

    आईना टूट कर तिरी!

    बे-साख़्ता बिखर गई जल्वों की काएनात, आईना टूट कर तिरी अंगड़ाई बन गया| साग़र सिद्दीक़ी

  • 20th Aug 2024

    आज है तेरा जनम दिन!

    आज एक बार फिर मैं हिन्दी गीतों के राजकुँवर कहलाने वाले श्रेष्ठ गीतकार स्वर्गीय गोपाल दास नीरज जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ| नीरज जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए प्रस्तुत है स्वर्गीय गोपाल दास नीरज जी का यह गीत – आज है तेरा जनम दिन, तेरी…

  • 19th Aug 2024

    इक पल का सामना!

    बज़्म-ए -वफ़ा में आप से इक पल का सामना, याद आ गया तो अहद-ए-शनासाई बन गया| साग़र सिद्दीक़ी

  • 19th Aug 2024

    तेरी गली के मोड़ पे!

    दैर ओ हरम की राह से दिल बच गया मगर, तेरी गली के मोड़ पे सौदाई बन गया| साग़र सिद्दीक़ी

  • 19th Aug 2024

    मैं आप-अपने घर का!

    इस दर्जा इश्क़ मौजिब-ए-रुस्वाई बन गया, मैं आप-अपने घर का तमाशाई बन गया| साग़र सिद्दीक़ी

  • 19th Aug 2024

    सुन के अपने ज़मीर!

    सुन के अपने ज़मीर की आवाज़, ख़ुद को क्यूँ शर्मसार कर लिया जाए| राजेश रेड्डी

  • 19th Aug 2024

    ख़ुद को ही संगसार !

    पत्थर औरों पे अब नहीं उठते, ख़ुद को ही संगसार कर लिया जाए| राजेश रेड्डी

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