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सर रख के मिरे सीने!
मैं अपनी हर इक साँस उसी रात को दे दूँ, सर रख के मिरे सीने पे सो जाओ किसी दिन| अमजद इस्लाम अमजद
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इस तरह मिरी रात!
गुज़रें जो मेरे घर से तो रुक जाएँ सितारे, इस तरह मिरी रात को चमकाओ किसी दिन| अमजद इस्लाम अमजद
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फूलों की तरह मुझ पे!
ख़ुशबू की तरह गुज़रो मिरी दिल की गली से, फूलों की तरह मुझ पे बिखर जाओ किसी दिन| अमजद इस्लाम अमजद
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बादल की तरह झूम के!
पेड़ों की तरह हुस्न की बारिश में नहा लूँ, बादल की तरह झूम के घर आओ किसी दिन| अमजद इस्लाम अमजद
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खुल जाओ किसी दिन!
राज़ों की तरह उतरो मिरे दिल में किसी शब, दस्तक पे मिरे हाथ की खुल जाओ किसी दिन| अमजद इस्लाम अमजद
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बरस जाओ किसी दिन!
चेहरे पे मिरे ज़ुल्फ़ को फैलाओ किसी दिन, क्या रोज़ गरजते हो बरस जाओ किसी दिन| अमजद इस्लाम अमजद
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आत्म अनात्म!
आज एक बार फिर मैं हिन्दी के अनूठे कवि स्वर्गीय भवानी प्रसाद मिश्र जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ|भवानी दादा की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय भवानी प्रसाद मिश्र जी की यह कविता- समझ में आ जानाकुछ नहीं है भीतर समझ लेने के बादएक…
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दुनिया के कारोबार से!
दुनिया के कारोबार से मतलब नहीं ‘मजीद’, दिल को ख़याल-ए-यार से बहला रहे हैं हम| अब्दुल मजीद ख़ाँ मजीद