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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 17th Sep 2024

    देख रहा हूँ तुझ में!

    बा-वफ़ाई की अदा पाने लगा हूँ तुझ में,ऐ जफ़ा-दोस्त ये क्या देख रहा हूँ तुझ में| शमीम जयपुरी

  • 17th Sep 2024

    सृजन के क्षण!

    आज एक बार फिर मैं विख्यात कवि स्वर्गीय कुँवर नारायण जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| आपकी कविताएं अज्ञेय जी द्वारा संपादित ‘तीसरा सप्तक’ में भी शामिल की गई थीं| इनकी कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय कुँवर नारायण जी की यह कविता  –  रात मीठी…

  • 16th Sep 2024

    दास्ताँ सुनाता जा!

    बहुत दिनों से दिल-ओ-जाँ की महफ़िलें हैं उदास,कोई तराना कोई दास्ताँ सुनाता जा| अली सरदार जाफ़री

  • 16th Sep 2024

    नक़ाब उठाता जा!

    दिखा के जलवा-ए-फ़र्दा बना दे दीवाना,नए ज़माने के रुख़ से नक़ाब उठाता जा| अली सरदार जाफ़री

  • 16th Sep 2024

    बला से बज़्म में गर!

    बला से बज़्म में गर ज़ौक़-ए-नग़्मगी कम है,नवा-ए-तल्ख़ को कुछ तल्ख़-तर बनाता जा| अली सरदार जाफ़री

  • 16th Sep 2024

    दूर शौक़ की मंज़िल!

    रह-ए-दराज़ है और दूर शौक़ की मंज़िल,गराँ है मरहला-ए-उम्र गीत गाता जा| अली सरदार जाफ़री

  • 16th Sep 2024

    गुलों को छेड़ के!

    गुज़र चमन से मिसाल-ए-नसीम-ए-सुब्ह-ए-बहार*,गुलों को छेड़ के काँटों को गुदगुदाता जा| *Like Cool Winds Of Dawn अली सरदार जाफ़री

  • 16th Sep 2024

    ज़िंदगी की बरात!

    भटक रही है अँधेरे में ज़िंदगी की बरात,कोई चराग़ सर-ए-रहगुज़र जलाता जा| अली सरदार जाफ़री

  • 16th Sep 2024

    ये एक पल है उसे!

    अदम हयात से पहले अदम हयात के बा’द,ये एक पल है उसे जावेदाँ बनाता जा| अली सरदार जाफ़री

  • 16th Sep 2024

    कँवल खिलाता जा!

    अब आ गया है जहाँ में तो मुस्कुराता जा,चमन के फूल दिलों के कँवल खिलाता जा| अली सरदार जाफ़री

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