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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 23rd Sep 2024

    यूँ प्यार नहीं छुपता !

    यूँ प्यार नहीं छुपता पलकों के झुकाने से,आँखों के लिफ़ाफ़ों में तहरीर चमकती है| बशीर बद्र

  • 23rd Sep 2024

    याद तिरी शब भर!

    लोबान में चिंगारी जैसे कोई रख जाए,यूँ याद तिरी शब भर सीने में सुलगती है| बशीर बद्र

  • 23rd Sep 2024

    चिलमन सी सरकती!

    जब रात की तन्हाई दिल बन के धड़कती है,यादों के दरीचों में चिलमन सी सरकती है| बशीर बद्र

  • 23rd Sep 2024

    सचमुच, इधर तुम्हारी याद!

    आज मैं श्रेष्ठ हिन्दी कवि स्वर्गीय त्रिलोचन जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| | त्रिलोचन जी का मूल नाम वासुदेव सिंह था| त्रिलोचन जी की अधिक रचनाएं मैंने पहले शेयर नहीं की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय त्रिलोचन जी की यह कविता – आज मैं श्रेष्ठ हिन्दी कवि स्वर्गीय त्रिलोचन जी की…

  • 22nd Sep 2024

    शोर भरे काले नारों से!

    भाग रही है गेंद के पीछे जाग रही है चाँद के नीचे,शोर भरे काले नारों से अब तक डरी नहीं है दुनिया| निदा फ़ाज़ली

  • 22nd Sep 2024

    लगता है जैसे तुम से!

    घर में ही मत उसे सजाओ इधर उधर भी ले के जाओ,यूँ लगता है जैसे तुम से अब तक खुली नहीं है दुनिया| निदा फ़ाज़ली

  • 22nd Sep 2024

    जैसी तुम्हें दिखाई दी!

    चार घरों के एक मोहल्ले के बाहर भी है आबादी,जैसी तुम्हें दिखाई दी है सब की वही नहीं है दुनिया| निदा फ़ाज़ली

  • 22nd Sep 2024

    बच्चों के स्कूल में!

    जितनी बुरी कही जाती है उतनी बुरी नहीं है दुनिया,बच्चों के स्कूल में शायद तुम से मिली नहीं है दुनिया| निदा फ़ाज़ली

  • 22nd Sep 2024

    दुनिया के मिट जाने!

    ख़ुशियों के बटवारे तक ही ऊँचे नीचे आगे पीछे,दुनिया के मिट जाने का डर जितना तेरा उतना मेरा| निदा फ़ाज़ली

  • 22nd Sep 2024

    सदियों का इतिहास!

    साँसें जितनी मौजें उतनी सब की अपनी अपनी गिनती,सदियों का इतिहास समुंदर जितना तेरा उतना मेरा| निदा फ़ाज़ली

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