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मदहोशी में एहसास!
मद-होशी में एहसास के ऊँचे ज़ीने से गिर जाने दे,इस वक़्त न मुझ को थाम कि साक़ी रात गुज़रने वाली है| क़तील शिफ़ाई
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वक़्त नहीं है बातों का !
ये वक़्त नहीं है बातों का पलकों के साए काम में ला,इल्हाम कोई इल्हाम कि साक़ी रात गुज़रने वाली है| क़तील शिफ़ाई
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हताश!
आज एक बार मैं छायावाद युग के एक प्रमुख स्तंभ और हिन्दी कविता के विराट पुरुष स्वर्गीय सूर्यकांत त्रिपाठी निराला जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ| निराला जी की अनेक रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय सूर्यकांत त्रिपाठी निराला जी का यह गीत – जीवन चिरकालिक…
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नज़्ज़ारा दरिया-नोशी!
गो देख चुका हूँ पहले भी नज़्ज़ारा दरिया-नोशी का,एक और सला-ए-आम कि साक़ी रात गुज़रने वाली है| क़तील शिफ़ाई
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देख सितारों के मोती!
वो देख सितारों के मोती हर आन बिखरते जाते हैं,अफ़्लाक पे है कोहराम कि साक़ी रात गुज़रने वाली है| क़तील शिफ़ाई
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आओ मिल आएँ !
दो घड़ी आओ मिल आएँ किसी ‘ग़ालिब’ से ‘क़तील’,हज़रत-ए-‘ज़ौक़’ तो वाबस्ता हैं दरबार के साथ| क़तील शिफ़ाई
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जान ले ले मिरी!
दुश्मनी मुझ से किए जा मगर अपना बन कर,जान ले ले मिरी सय्याद मगर प्यार के साथ| क़तील शिफ़ाई
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लफ़्ज़ चुनता हूँ तो!
लफ़्ज़ चुनता हूँ तो मफ़्हूम बदल जाता है,इक न इक ख़ौफ़ भी है जुरअत-ए-इज़हार के साथ| क़तील शिफ़ाई
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ग़म-ए-यार के साथ!
किस तरह अपनी मोहब्बत की मैं तकमील करूँ,ग़म-ए-हस्ती भी तो शामिल है ग़म-ए-यार के साथ| क़तील शिफ़ाई