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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 29th Mar 2025

    मुद्दत के बा’द ‘नूर’!

    मुद्दत के बा’द ‘नूर’ हँसी लब पे आई है,वो अपना हम-ख़याल बना ले गया मुझे| कृष्ण बिहारी नूर

  • 29th Mar 2025

    बहा ले गया मुझे!

    तूफ़ाँ के बा’द मैं भी बहुत टूट सा गया,दरिया फिर अपने रुख़ पे बहा ले गया मुझे| कृष्ण बिहारी नूर

  • 29th Mar 2025

    झोंका हवा का आया!

    धरती का ये सफ़र मिरा जिस दिन हुआ तमाम,झोंका हवा का आया उड़ा ले गया मुझे| कृष्ण बिहारी नूर

  • 29th Mar 2025

    उतारी जाए!

    आज मैं हिंदी के श्रेष्ठ कवि स्वर्गीय चंद्रसेन विराट जी की एक कवि ग़ज़ल शेयर कर रहा हूँ। विराट जी की रचनाएं मैंने पहले शेयर नहीं की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय चंद्रसेन विराट जी की ये ग़ज़ल –  अब हथेली न पसारी जाए.धार पर्वत से उतारी जाए. अपनी जेबो में भरे जो पानीउसकी…

  • 28th Mar 2025

    बस तेरा प्यार था जो!

    आवागमन की क़ैद से क्या छूटता कभी,बस तेरा प्यार था जो छुड़ा ले गया मुझे| कृष्ण बिहारी नूर

  • 28th Mar 2025

    इक जान-दार लाश!

    इक जान-दार लाश समझिए मिरा वजूद,अब क्या धरा है कोई चुरा ले गया मुझे| कृष्ण बिहारी नूर

  • 28th Mar 2025

    हो वापसी अगर तो!

    हो वापसी अगर तो इन्हें रास्तों से हो,जिन रास्तों से प्यार तिरा ले गया मुझे| कृष्ण बिहारी नूर

  • 28th Mar 2025

    उठा ले गया मुझे!

    मुद्दत से एक रात भी अपनी नहीं हुई,हर शाम कोई आया उठा ले गया मुझे| कृष्ण बिहारी नूर

  • 28th Mar 2025

    वो मना ले गया मुझे!

    अब उस को अपनी हार कहूँ या कहूँ मैं जीत,रूठा हुआ था मैं वो मना ले गया मुझे| कृष्ण बिहारी नूर

  • 28th Mar 2025

    वो छुपा ले गया मुझे!

    पलकों की ओट में वो छुपा ले गया मुझे,या’नी नज़र नज़र से बचा ले गया मुझे| कृष्ण बिहारी नूर

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