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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 25th Mar 2025

    एक मोहब्बत और!

    एक मोहब्बत और वो भी नाकाम मोहब्बत,लेकिन इस से काम चलाया जा सकता है| अब्बास ताबिश

  • 25th Mar 2025

    पानी आँख में भर कर!

    पानी आँख में भर कर लाया जा सकता है,अब भी जलता शहर बचाया जा सकता है| अब्बास ताबिश

  • 25th Mar 2025

    जो मुझको किसी और!

    वो कौन है उस से तो मैं वाक़िफ़ भी नहीं हूँ,जो मुझ को किसी और का होने नहीं देता| अब्बास ताबिश

  • 25th Mar 2025

    मैं आप उठाता हूँ !

    मैं आप उठाता हूँ शब-ओ-रोज़ की ज़िल्लत,ये बोझ किसी और को ढोने नहीं देता| अब्बास ताबिश

  • 25th Mar 2025

    बच्चा तो कभी अपने!

    तुम माँग रहे हो मिरे दिल से मिरी ख़्वाहिश,बच्चा तो कभी अपने खिलौने नहीं देता| अब्बास ताबिश

  • 25th Mar 2025

    हँसने नहीं देता कभी!

    हँसने नहीं देता कभी रोने नहीं देता,ये दिल तो कोई काम भी होने नहीं देता| अब्बास ताबिश

  • 25th Mar 2025

    ठहराव!

    आज मैं हिंदी के श्रेष्ठ कवि श्री गिरधर राठी जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ। राठी जी की अधिक कविताएं मैंने पहले शेयर नहीं की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है श्री गिरधर राठी जी की ये कविता- बार-बार देखने लगता था पीछेउधर उस छोर पर घिसटता आता था सचइस के और उस के…

  • 24th Mar 2025

    या जगा देते हैं ज़र्रों!

    या जगा देते हैं ज़र्रों के दिलों में मय-कदे, या बना लेते हैं मेहर-ओ-माह को पैमाना हम| अली सरदार जाफ़री

  • 24th Mar 2025

    रफ़्ता रफ़्ता बन गए!

    मिटते मिटते दे गए हम ज़िंदगी को रंग-ओ-नूर,रफ़्ता रफ़्ता बन गए इस अहद का अफ़्साना हम| अली सरदार जाफ़री

  • 24th Mar 2025

    आए हैं ज़िंदाँ में भी!

    राह में फ़ौजों के पहरे सर पे तलवारों की छाँव,आए हैं ज़िंदाँ* में भी बा-शौकत-ए-शाहाना हम|*Prison अली सरदार जाफ़री

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