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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 23rd Mar 2025

    फिर उस गली से!

    फिर उस गली से गुज़रना पड़ा तिरी ख़ातिर,फिर उस गली से बहुत बे-क़रार आए हम| अज़हर इक़बाल

  • 23rd Mar 2025

    तिरे बग़ैर जो उम्रें!

    तिरे ही लम्स से उन का ख़िराज मुमकिन है, तिरे बग़ैर जो उम्रें गुज़ार आए हम| अज़हर इक़बाल

  • 22nd Mar 2025

    वो एक झील थी!

    वो एक झील थी शफ़्फ़ाफ़ नील पानी की,और उस में डूब को ख़ुद को निखार आए हम| अज़हर इक़बाल

  • 22nd Mar 2025

    गुलाब चाँदनी-रातों पे!

    गुलाब चाँदनी-रातों पे वार आए हम,तुम्हारे होंटों का सदक़ा उतार आए हम| अज़हर इक़बाल

  • 22nd Mar 2025

    वैसे दिल में क्या क्या!

    तुम जो गए तो भूल गए सारी बातें,वैसे दिल में क्या क्या चलता रहता है| अज़हर इक़बाल

  • 22nd Mar 2025

    राख हुई जाती है!

    राख हुई जाती है सारी हरियाली,आँखों में जंगल सा जलता रहता है| अज़हर इक़बाल

  • 22nd Mar 2025

    मौसम पल पल!

    मंज़र मंज़र जी लो जितना जी पाओ,मौसम पल पल रंग बदलता रहता है| अज़हर इक़बाल

  • 22nd Mar 2025

    सन्नाटा आवाज़ में!

    सरगोशी को कान तरसते रहते हैं,सन्नाटा आवाज़ में ढलता रहता है| अज़हर इक़बाल

  • 22nd Mar 2025

    वैसे वैसे जिस्म!

    जैसे जैसे यादों कि लौ बढ़ती है,वैसे वैसे जिस्म पिघलता रहता है| अज़हर इक़बाल

  • 22nd Mar 2025

    दिल की गली में चाँद!

    दिल की गली में चाँद निकलता रहता है,एक दिया उम्मीद का जलता रहता है| अज़हर इक़बाल

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