Skip to content

SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
    • Activity
    • Members
    • Sample Page
    • Sample Page
    • Sample Page
    • About
    • Contact
  • 25th Oct 2024

    आपने अच्छा समझा!

    मैं ये समझा हूँ कि समझे न मिरी बात को आप,सर हिला कर जो कहा आप ने अच्छा समझा| बेख़ुद देहलवी

  • 25th Oct 2024

    दुनिया को तमाशा!

    जो तमाशा नज़र आया उसे देखा समझा,जब समझ आ गई दुनिया को तमाशा समझा| बेख़ुद देहलवी

  • 25th Oct 2024

    गालियाँ बद-ज़बान!

    नाम सुनता है जब वो ‘बेख़ुद’ का,गालियाँ बद-ज़बान देता है| बेख़ुद देहलवी

  • 25th Oct 2024

    मरने वालों पे जान!

    तुझ से बा-वज़्अ है तिरा ख़ंजर,मरने वालों पे जान देता है| बेख़ुद देहलवी

  • 25th Oct 2024

    सारा जहान देता है!

    क्या दिया हम ने जान दी जो उसे,ये तो सारा जहान देता है| बेख़ुद देहलवी

  • 25th Oct 2024

    तुझे इम्तिहान देता है!

    जो तुझे इम्तिहान देता है,किस ख़ुशी से वो जान देता है| बेख़ुद देहलवी

  • 25th Oct 2024

    अपनी खिड़की से!

    आज एक बार फिर मैं, हिन्दी के आधुनिक कवि श्री अशोक वाजपेयी जी की  एक कविता शेयर कर रहा हूँ| अशोक वाजपेयी जी की अनेक रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है श्री अशोक वाजपेयी जी की यह कविता –  मैं अपनी खिड़की से पुकारना चाहता हूँकि सामने के चर्च मेंप्रार्थनाओं…

  • 24th Oct 2024

    तुझे जब याद करते हैं!

    न जानी क़द्र तेरी उम्र-ए-रफ़्ता हम ने कॉलेज में,निकल आते हैं आँसू अब तुझे जब याद करते हैं| चकबस्त ब्रिज नारायण

  • 24th Oct 2024

    वही शागिर्द हैं जो!

    अदब ता’लीम का जौहर है ज़ेवर है जवानी का,वही शागिर्द हैं जो ख़िदमत-ए-उस्ताद करते हैं| चकबस्त ब्रिज नारायण

  • 24th Oct 2024

    हमेशा भूलते जाते हैं!

    सबक़ उम्र-ए-रवाँ का दिल-नशीं होने नहीं पाता,हमेशा भूलते जाते हैं जो कुछ याद करते हैं| चकबस्त ब्रिज नारायण

←Previous Page
1 … 443 444 445 446 447 … 1,391
Next Page→

Blog at WordPress.com.

Privacy & Cookies: This site uses cookies. By continuing to use this website, you agree to their use.
To find out more, including how to control cookies, see here: Cookie Policy
  • Subscribe Subscribed
    • SamaySakshi
    • Join 1,143 other subscribers.
    • Already have a WordPress.com account? Log in now.
    • SamaySakshi
    • Subscribe Subscribed
    • Sign up
    • Log in
    • Report this content
    • View site in Reader
    • Manage subscriptions
    • Collapse this bar