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इस क्षण!
आज एक बार फिर मैं हिन्दी के श्रेष्ठ नवगीतकार स्वर्गीय ओम प्रभाकर जी का एक नवगीत शेयर कर रहा हूँ| ओम प्रभाकर जी की अनेक रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय ओम प्रभाकर जी का यह नवगीत – इस क्षण यहाँ शान्त है जल। पेड़ गड़े हैं,घास जड़ी।हवा सामने…
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तर्ज़-ए-बयाँ ठहरी है!
हम ने जो तर्ज़-ए-फ़ुग़ाँ की है क़फ़स में ईजाद,‘फ़ैज़’ गुलशन में वही तर्ज़-ए-बयाँ ठहरी है| फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
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जाते जाते यूँही!
आते आते यूँही दम भर को रुकी होगी बहार,जाते जाते यूँही पल भर को ख़िज़ाँ ठहरी है| फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
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बू-ए-गुल ठहरी न!
दस्त-ए-सय्याद भी आजिज़ है कफ़-ए-गुल-चीं भी,बू-ए-गुल ठहरी न बुलबुल की ज़बाँ ठहरी है| फ़ैज़ अहमद फ़ैज़