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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 1st Nov 2024

    ध्यान में खोए होंगे!

    क्या अजब है वो मिले भी हों ‘फ़राज़’,हम किसी ध्यान में खोए होंगे| अहमद फ़राज़

  • 1st Nov 2024

    हँसते हुए तारों ने!

    रात भर हँसते हुए तारों ने,उन के आरिज़ भी भिगोए होंगे| अहमद फ़राज़

  • 1st Nov 2024

    ना-ख़ुदाओं ने डुबोए!

    वो सफ़ीने जिन्हें तूफ़ाँ न मिले,ना-ख़ुदाओं ने डुबोए होंगे| अहमद फ़राज़

  • 1st Nov 2024

    इस क्षण!

    आज एक बार फिर मैं हिन्दी के श्रेष्ठ नवगीतकार स्वर्गीय ओम प्रभाकर जी का एक नवगीत शेयर कर रहा हूँ| ओम प्रभाकर जी की अनेक रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय ओम प्रभाकर जी का यह नवगीत – इस क्षण यहाँ शान्त है जल। पेड़ गड़े हैं,घास जड़ी।हवा सामने…

  • 31st Oct 2024

    काँटों में पिरोए होंगे!

    सुब्ह तक दस्त-ए-सबा ने क्या क्या,फूल काँटों में पिरोए होंगे| अहमद फ़राज़

  • 31st Oct 2024

    आप भी रोए होंगे!

    बाज़ औक़ात ब-मजबूरी-ए-दिल,हम तो क्या आप भी रोए होंगे| अहमद फ़राज़

  • 31st Oct 2024

    आराम से सोए होंगे!

    जब भी दिल खोल के रोए होंगे, लोग आराम से सोए होंगे| अहमद फ़राज़

  • 31st Oct 2024

    तर्ज़-ए-बयाँ ठहरी है!

    हम ने जो तर्ज़-ए-फ़ुग़ाँ की है क़फ़स में ईजाद,‘फ़ैज़’ गुलशन में वही तर्ज़-ए-बयाँ ठहरी है| फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

  • 31st Oct 2024

    जाते जाते यूँही!

    आते आते यूँही दम भर को रुकी होगी बहार,जाते जाते यूँही पल भर को ख़िज़ाँ ठहरी है| फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

  • 31st Oct 2024

    बू-ए-गुल ठहरी न!

    दस्त-ए-सय्याद भी आजिज़ है कफ़-ए-गुल-चीं भी,बू-ए-गुल ठहरी न बुलबुल की ज़बाँ ठहरी है| फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

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