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बिठा के दिल में!
बिठा के दिल में गिराया गया नज़र से मुझे,दिखाया तुरफ़ा-तमाशा बला के घर से मुझे| गुलज़ार देहलवी
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अपना हाल सँभालूँ!
तुम्हारी याद में जीने की आरज़ू है अभी,कुछ अपना हाल सँभालूँ अगर इजाज़त हो| जौन एलिया
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अपने ज़ख़्म दिखा लूँ!
किसे है ख़्वाहिश-ए-मरहम-गरी मगर फिर भी,मैं अपने ज़ख़्म दिखा लूँ अगर इजाज़त हो| जौन एलिया
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हम तो जाते अपने गांव।
अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं मुकेश जी का गाया एक और मधुर गीत अपने स्वर में प्रस्तुत कर रहा हूँ जिसे उन्होंने ‘दीवाना’ फिल्म के लिए गाया था- हम तो जाते अपने गांव, अपनी राम, राम, राम। आशा है आपको यह पसंद आएगा, धन्यवाद। *******
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जुनूँ वही है वही मैं!
जुनूँ वही है वही मैं मगर है शहर नया,यहाँ भी शोर मचा लूँ अगर इजाज़त हो| जौन एलिया
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मौन और शब्द !
आज एक बार फिर मैं हिंदी गीत के शिखर पुरूष स्वर्गीय हरिवंशराय बच्चन जी की एक अलग तरह की रचना शेयर कर रहा हूँ। बच्चन जी की अनेक रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय हरिवंशराय बच्चन जी की यह कविता- एक दिन मैंनेमौन में शब्द को धँसाया थाऔर एक…
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अपना वक़्त गँवा लूँ!
तुम्हारे बा‘द भला क्या हैं वअदा-ओ-पैमाँ, बस अपना वक़्त गँवा लूँ अगर इजाज़त हो| जौन एलिया
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तुम्हारा हिज्र मना लूँ!
तुम्हारा हिज्र मना लूँ अगर इजाज़त हो,मैं दिल किसी से लगा लूँ अगर इजाज़त हो| जौन एलिया
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हुस्न ओ इश्क़ की!
हुस्न ओ इश्क़ की लाग में अक्सर छेड़ उधर से होती है,शम्अ’ का शो’ला जब लहराया उड़ के चला परवाना भी| आरज़ू लखनवी
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ग़ुंचे चुप हैं गुल हैं हवा!
ग़ुंचे चुप हैं गुल हैं हवा पर किस से कहिए जी का हाल,ख़ाक-नशीं इक सब्ज़ा है सो अपना भी बेगाना भी| आरज़ू लखनवी