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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 28th Nov 2024

    क्यूँ वक़्त एक मोड़ पे!

    चल चल के थक गया है कि मंज़िल नहीं कोई,क्यूँ वक़्त एक मोड़ पे ठहरा हुआ सा है| शहरयार

  • 28th Nov 2024

    गुलशन में इस तरह से!

    गुलशन में इस तरह से कब आई थी फ़स्ल-ए-गुल,हर फूल अपनी शाख़ से टूटा हुआ सा है| शहरयार

  • 28th Nov 2024

    दिल आज तेरी याद!

    किस फ़िक्र किस ख़याल में खोया हुआ सा है दिल आज तेरी याद को भूला हुआ सा है1 शहरयार

  • 28th Nov 2024

    पीले फूल कनेर के!

    आज मैं विख्यात हिन्दी कवि स्वर्गीय नरेश मेहता जी का एक नवगीत शेयर कर रहा हूँ| मेहता जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय नरेश मेहता जी का यह नवगीत   –  पीले फूल कनेर केपट अंगोरते सिन्दूरी बड़री अँखियन केफूले फूल दुपेर के। दौड़ी हिरनाबन-बन अंगनावोंत वनों…

  • 27th Nov 2024

    मुफ़्त हाथ आए तो!

    मैं ने माना कि कुछ नहीं ‘ग़ालिब’,मुफ़्त हाथ आए तो बुरा क्या है| मिर्ज़ा ग़ालिब

  • 27th Nov 2024

    नहीं जानता दुआ!

    जान तुम पर निसार करता हूँ,मैं नहीं जानता दुआ क्या है| मिर्ज़ा ग़ालिब

  • 27th Nov 2024

    दरवेश की सदा!

    हाँ भला कर तिरा भला होगा,और दरवेश की सदा क्या है| मिर्ज़ा ग़ालिब

  • 27th Nov 2024

    जो नहीं जानते वफ़ा!

    हम को उन से वफ़ा की है उम्मीद,जो नहीं जानते वफ़ा क्या है| मिर्ज़ा ग़ालिब

  • 27th Nov 2024

    सब्ज़ा ओ गुल!

    सब्ज़ा ओ गुल कहाँ से आए हैं,अब्र क्या चीज़ है हवा क्या है| मिर्ज़ा ग़ालिब

  • 27th Nov 2024

    हंगामा ऐ ख़ुदा क्या है!

    जब कि तुझ बिन नहीं कोई मौजूद,फिर ये हंगामा ऐ ख़ुदा क्या है| मिर्ज़ा ग़ालिब

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