Skip to content

SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
    • Activity
    • Members
    • Sample Page
    • Sample Page
    • Sample Page
    • About
    • Contact
  • 16th May 2025

    नीम-शब की ख़ामोशी

    नीम-शब की ख़ामोशी में भीगती सड़कों पे कल, तेरी यादों के जिलौ में घूमना अच्छा लगा| अमजद इस्लाम अमजद

  • 16th May 2025

    वो मिला तो सब!

    दिल में कितने अहद बाँधे थे भुलाने के उसे, वो मिला तो सब इरादे तोड़ना अच्छा लगा| अमजद इस्लाम अमजद

  • 16th May 2025

    चाय में चीनी मिलाना!

    चाय में चीनी मिलाना उस घड़ी भाया बहुत, ज़ेर-ए-लब वो मुस्कुराता शुक्रिया अच्छा लगा| अमजद इस्लाम अमजद

  • 16th May 2025

    हाथ को होंटों पे रख!

    बात तो कुछ भी नहीं थीं लेकिन उस का एक दम, हाथ को होंटों पे रख कर रोकना अच्छा लगा| अमजद इस्लाम अमजद

  • 16th May 2025

    सुरमई आँखों के नीचे!

    सुरमई आँखों के नीचे फूल से खिलने लगे, कहते कहते कुछ किसी का सोचना अच्छा लगा| अमजद इस्लाम अमजद

  • 16th May 2025

    भीड़ में इक अजनबी!

    भीड़ में इक अजनबी का सामना अच्छा लगा, सब से छुप कर वो किसी का देखना अच्छा लगा| अमजद इस्लाम अमजद

  • 16th May 2025

    उसे अपने होंटों का!

    उसे अपने होंटों का लम्स दो कि ये साँस ले, ये जो पेड़ है ये हरा-भरा नहीं हो रहा| अज़हर इक़बाल

  • 16th May 2025

    मिरा रौशनी से भी!

    कोई रात आ के ठहर गई मिरी ज़ात में,मिरा रौशनी से भी राब्ता नहीं हो रहा| अज़हर इक़बाल

  • 16th May 2025

    खुला रहने दो!

    आज मैं हिंदी के श्रेष्ठ साहित्यकार और कवि स्वर्गीय रांगेय राघव जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ। इनकी रचनाएं मैंने पहले शेयर नहीं की हैं।   लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय रांगेय राघव जी की यह कविता  – गगन निविड़ घाटीमुझे मिली भूमि                सघन माटी;उगी कली बंद,जीवन का छंद                रस-लहरी साकार,                गंध निराधार,बहता हैअनदेखा समीर,काल-कुहर स्पर्श,                पर…

  • 15th May 2025

    तेरी बंदगी से मिरा!

    तू ख़ुदा-ए-हुस्न-ओ-जमाल है तो हुआ करे, तेरी बंदगी से मिरा भला नहीं हो रहा| अज़हर इक़बाल

←Previous Page
1 … 414 415 416 417 418 … 1,528
Next Page→

Blog at WordPress.com.

Privacy & Cookies: This site uses cookies. By continuing to use this website, you agree to their use.
To find out more, including how to control cookies, see here: Cookie Policy
  • Subscribe Subscribed
    SamaySakshi
    Join 1,132 other subscribers.

    Have a WordPress.com account? Log in now.

  • SamaySakshi
    View site in Reader
    Manage subscriptionsSign upLog in
    Report this content
    Collapse this bar