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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 14th May 2025

    मुझे ख़रीदने ऐसे भी!

    मुझे ख़रीदने ऐसे भी लोग आते हैं, कि जिन के कहने से क़ीमत घटानी पड़ती है| हसीब सोज़

  • 14th May 2025

    हमें तो रोज़ ये!

    तुम एक बार जो टूटे तो जुड़ नहीं पाए,हमें तो रोज़ ये ज़िल्लत उठानी पड़ती है| हसीब सोज़

  • 14th May 2025

    बड़े हिसाब से!

    बड़े हिसाब से इज़्ज़त बचानी पड़ती है, हमेशा झूटी कहानी सुनानी पड़ती है| हसीब सोज़

  • 14th May 2025

    शीशा टूट जाता है!

    किसी से इश्क़ करते हो तो फिर ख़ामोश रहिएगा, ज़रा सी ठेस से वर्ना ये शीशा टूट जाता है| हसीब सोज़

  • 14th May 2025

    मगर वो क्या करे!

    तसल्ली देने वाले तो तसल्ली देते रहते हैं,मगर वो क्या करे जिस का भरोसा टूट जाता है| हसीब सोज़

  • 14th May 2025

    बाहर के मधुबन से!

    आज मैं हिंदी के श्रेष्ठ कवि स्वर्गीय रामस्वरूप सिंदूर जी का एक गीत  शेयर कर रहा हूँ। इनकी अधिक रचनाएं मैंने पहले शेयर नहीं की हैं।   लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय राम्स्वरूप सिंदूर जी का यह गीत  – आज मैं हिंदी के श्रेष्ठ कवि स्वर्गीय रामस्वरूप सिंदूर जी का एक गीत  शेयर कर रहा…

  • 13th May 2025

    न इतना शोर कर!

    न इतना शोर कर ज़ालिम हमारे टूट जाने पर,कि गर्दिश में फ़लक से भी सितारा टूट जाता है| हसीब सोज़

  • 13th May 2025

    कई झूटे इकट्ठे हों!

    यहाँ मज़बूत से मज़बूत लोहा टूट जाता है,कई झूटे इकट्ठे हों तो सच्चा टूट जाता है| हसीब सोज़

  • 13th May 2025

    तजरबे आए थे!

    देर तक हँसता रहा उन पर हमारा बचपना,तजरबे आए थे संजीदा बनाने के लिए| ज़फ़र गोरखपुरी

  • 13th May 2025

    ये शोर बनेगा किसी!

    ये शोर बनेगा किसी बेकस का तराना, दुनिया मिरी ज़ंजीर से हैरान अभी है। क़मर अब्बास क़मर

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