-
गुलज़ार बन गई है!
उस नाज़नीं ने जब से किया है वहाँ क़याम,गुलज़ार बन गई है ज़मीन-ए-दकन तमाम| हसरत मोहानी
-
घेर लिया है चमन!
नश्व-ओ-नुमा-ए-सब्ज़ा-ओ-गुल से बहार में,शादाबियों ने घेर लिया है चमन तमाम| हसरत मोहानी
-
लबरेज़ आब-ए-नूर!
है नाज़-ए-हुस्न से जो फ़रोज़ाँ जबीन-ए-यार,लबरेज़ आब-ए-नूर है चाह-ए-ज़क़न तमाम| हसरत मोहानी
-
बेहोश इक नज़र में!
देखो तो चश्म-ए-यार की जादू-निगाहियाँ,बेहोश इक नज़र में हुई अंजुमन तमाम| हसरत मोहानी
-
ऐसे क्षण आए जीवन में!
आज मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि स्वर्गीय रामस्वरूप सिंदूर जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ। सिंदूर जी की रचनाएं मैंने पहले शेयर नहीं की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय रामस्वरूप सिंदूर जी का यह गीत – ऐसे क्षण आए जीवन में, माटी कंचन लगे!नयन रह जायें ठगे-ठगे! तन लहराये अगरु गन्ध-सामन लहरे किसलय-सा,हर…
-
दिल ख़ून हो चुका है!
दिल ख़ून हो चुका है जिगर हो चुका है ख़ाक, बाक़ी हूँ मैं मुझे भी कर ऐ तेग़-ज़न तमाम| हसरत मोहानी
-
रंगीनियों में डूब गया!
अल्लाह-री जिस्म-ए-यार की ख़ूबी कि ख़ुद-ब-ख़ुद,रंगीनियों में डूब गया पैरहन तमाम| हसरत मोहानी
-
दिल ने भी तेरे सीख!
हैरत ग़ुरूर-ए-हुस्न से शोख़ी से इज़्तिराब,दिल ने भी तेरे सीख लिए हैं चलन तमाम| हसरत मोहानी
-
सर्दी आज ग़ज़ब की!
मिरे सूरज आ! मिरे जिस्म पे अपना साया कर,बड़ी तेज़ हवा है सर्दी आज ग़ज़ब की है। शहरयार