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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 10th Jun 2025

    मैं इक सदा हूँ!

    मुझे तलाश करोगे तो फिर न पाओगे,मैं इक सदा हूँ सदाओं का घर नहीं होता| वसीम बरेलवी

  • 10th Jun 2025

    मुझे भी ख़ाक में!

    मैं उस की आँख का आँसू न बन सका वर्ना,मुझे भी ख़ाक में मिलने का डर नहीं होता| वसीम बरेलवी

  • 10th Jun 2025

    कभी लहू से भी!

    कभी लहू से भी तारीख़ लिखनी पड़ती है,हर एक मा’रका बातों से सर नहीं होता| वसीम बरेलवी

  • 10th Jun 2025

    मुक़द्दर में घर नहीं!

    सभी का धूप से बचने को सर नहीं होता,हर आदमी के मुक़द्दर में घर नहीं होता| वसीम बरेलवी

  • 10th Jun 2025

    कोई रक्तपलाश!

    आज मैं श्रेष्ठ हिंदी कवियित्री स्वर्गीय शांति सुमन जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| शांति सुमन जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है शांति सुमन जी की यह कविता – अबके इस होली में कोई रक्तपलाश खिलेअनुबन्धों की याद दिलाए, पीत कनेर हिले घाट नहाती लड़की…

  • 9th Jun 2025

    ख़ुशबू-ए-आवारा!

    हम ख़ुशबू-ए-आवारा हम नूर-ए-परेशाँ हैंऐ ‘बद्र’ मुक़द्दर में आशुफ़्ता-बयानी है बशीर बद्र

  • 9th Jun 2025

    जिसमें तिरे गेसू की!

    वो मिस्रा-ए-आवारा दीवानों पे भारी हैजिस में तिरे गेसू की बे-रब्त कहानी है बशीर बद्र

  • 9th Jun 2025

    ना-गुफ़्ता कहानी है!

    वो हुस्न जिसे हम ने रुस्वा किया दुनिया में,नादीदा* हक़ीक़त है ना-गुफ़्ता** कहानी है|*Unseen, **Untold बशीर बद्र

  • 9th Jun 2025

    यादों की कहानी है!

    दिन तल्ख़ हक़ाएक़ के सहराओं का सूरज है,शब गेसु-ए-अफ़्साना यादों की कहानी है| बशीर बद्र

  • 9th Jun 2025

    क्या जान गँवानी है!

    इस हौसला-ए-दिल पर हम ने भी कफ़न पहना,हँस कर कोई पूछेगा क्या जान गँवानी है| बशीर बद्र

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