-
असर पैदा कर!
दूद-ए-दिल इश्क़ में इतना तो असर पैदा कर,सर कटे शम्अ की मानिंद तो सर पैदा कर| बेख़ुद देहलवी
-
ये नहीं है सही वक़्त!
आज मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि स्वर्गीय राजकुमार कुंभज जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ। कुंभज जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। आप अज्ञेय जी द्वारा संपादित चौथा सप्तक में सम्मिलित थे। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय राजकुमार कुंभज जी की यह कविता – एक खिलाबुझ गया दूसरा उसी वक़्तसही…
-
जो इधर दिल में है !
दे मोहब्बत तो मोहब्बत में असर पैदा कर,जो इधर दिल में है या रब वो उधर पैदा कर| बेख़ुद देहलवी
-
सुख़न शनास है!
सुख़न शनास है कितना ये पूछ लूँ ‘क़ैसर’,नज़र वो आए जो हर्फ़-ओ-नवा के बंदों में| क़ैसर शमीम
-
सज़ाएँ मेरी तरह!
सज़ाएँ मेरी तरह हँस के झेलने वाला,नहीं है कोई भी अहद-ए-सज़ा के बंदों में| क़ैसर शमीम
-
कहाँ है बू-ए-वफ़ा!
वो कौन है जो नहीं अपनी मस्लहत का ग़ुलाम,कहाँ है बू-ए-वफ़ा अब वफ़ा के बंदों में| क़ैसर शमीम
-
है इंतिशार का आलम!
न कोई सम्त मुक़र्रर न कोई जा-ए-क़रार,है इंतिशार* का आलम हवा के बंदों में| *परेशानी क़ैसर शमीम
-
कहाँ है कोई ख़ुदा का!
कहाँ है कोई ख़ुदा का ख़ुदा के बंदों में,घिरा हुआ हूँ अभी तक अना के बंदों में| क़ैसर शमीम
-
तुम मुझे क्षमा करो!
आज मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि स्वर्गीय राजकमल चौधरी जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ। राजकमल चौधरी जी की रचनाएं मैंने पहले शेयर नहीं की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय राजकमल चौधरी जी की यह कविता – बहुत अंधी थीं मेरी प्रार्थनाएँ।मुस्कुराहटें मेरी विवशकिसी भी चंद्रमा के चतुर्दिकउगा नहीं पाई आकाश-गंगालगातार फूल-…
-
दूर की सदा क्या है!
उदास रात की ख़ामोशियों में ऐ ‘क़ैसर’,क़रीब आती हुई दूर की सदा क्या है| क़ैसर शमीम