Skip to content

SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
    • Activity
    • Members
    • Sample Page
    • Sample Page
    • Sample Page
    • About
    • Contact
  • 4th Jan 2025

    दोनों वक़्त मिलते हैं !

    दोनों वक़्त मिलते हैं दो दिलों की सूरत से,आसमाँ ने ख़ुश हो कर रंग सा बिखेरा है| साहिर लुधियानवी

  • 4th Jan 2025

    चम्पई अंधेरा है!

    पर्बतों के पेड़ों पर शाम का बसेरा है,सुरमई उजाला है चम्पई अंधेरा है| साहिर लुधियानवी

  • 4th Jan 2025

    छाता बना के रक्खा है!

    कोई बता दे ये सूरज को जा के हम ने भी,शजर को धूप में छाता बना के रक्खा है| मुनव्वर राना

  • 4th Jan 2025

    निशाना बना के रक्खा!

    मैं बच गया तो यक़ीनन ये मो’जिज़ा होगा,सभी ने मुझ को निशाना बना के रक्खा है| मुनव्वर राना

  • 4th Jan 2025

    अमीर-ए-शहर ने!

    किसे किसे अभी सज्दा-गुज़ार होना है,अमीर-ए-शहर ने खाता बना के रक्खा है| मुनव्वर राना

  • 4th Jan 2025

    हीरा बना के रक्खा है!

    तमाम उम्र का हासिल है ये हुनर मेरा,कि मैं ने शीशे को हीरा बना के रक्खा है| मुनव्वर राना

  • 4th Jan 2025

    यहाँ पे कोई बचाने!

    यहाँ पे कोई बचाने तुम्हें न आएगा,समुंदरों ने जज़ीरा बना के रक्खा है| मुनव्वर राना

  • 4th Jan 2025

    लालटेन!

    आज मैं हिंदी के एक श्रेष्ठ कवि श्री राजा खुगशाल जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ। खुगशाल जी की रचनाएं मैंने पहले शेयर नहीं की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है श्री राजा खुगशाल जी की यह कविता – अंधेरी रातों मेंइसके उजाले मेंपहाड़े रटते थे हमबैलों के रस्से बटते थे– डूंगर काकाइसके उजाले…

  • 3rd Jan 2025

    ये बुत जो हम ने!

    ये बुत जो हम ने दोबारा बना के रक्खा है,इसी ने हम को तमाशा बना के रक्खा है| मुनव्वर राना

  • 3rd Jan 2025

    बेवफ़ाई खेल का!

    बेवफ़ाई खेल का हिस्सा है जाने दे इसे,तज़्किरा उस से न कर शर्मिंदगी बढ़ जाएगी| मुनव्वर राना

←Previous Page
1 … 384 385 386 387 388 … 1,387
Next Page→

Blog at WordPress.com.

Privacy & Cookies: This site uses cookies. By continuing to use this website, you agree to their use.
To find out more, including how to control cookies, see here: Cookie Policy
  • Subscribe Subscribed
    • SamaySakshi
    • Join 1,143 other subscribers.
    • Already have a WordPress.com account? Log in now.
    • SamaySakshi
    • Subscribe Subscribed
    • Sign up
    • Log in
    • Report this content
    • View site in Reader
    • Manage subscriptions
    • Collapse this bar