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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 28th Mar 2025

    सोचता रोज़ हूँ मैं!

    शाम होते ही खुली सड़कों की याद आती है,सोचता रोज़ हूँ मैं घर से नहीं निकलूँगा। शहरयार

  • 28th Mar 2025

    औरत!

    आज मैं हिंदी के श्रेष्ठ कवि स्वर्गीय चंद्रकांत देवताले जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ। देवताले जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय चंद्रकांत देवताले जी की ये कविता- वह औरतआकाश और पृथ्वी के बीचकब से कपड़े पछीट रही है, पछीट रही है शताब्दियों सेधूप…

  • 27th Mar 2025

    तुझे सिर्फ़ तुझे देखूँगा!

    देखने के लिए इक चेहरा बहुत होता है,आँख जब तक है तुझे सिर्फ़ तुझे देखूँगा। शहरयार

  • 27th Mar 2025

    तेरे वा’दे को कभी!

    तेरे वा’दे को कभी झूट नहीं समझूँगा,आज की रात भी दरवाज़ा खुला रक्खूँगा। शहरयार

  • 27th Mar 2025

    बड़ी तेज़ हवा है!

    मिरे सूरज आ! मिरे जिस्म पे अपना साया कर,बड़ी तेज़ हवा है सर्दी आज ग़ज़ब की है। शहरयार

  • 27th Mar 2025

    तुझे भूल गया कभी!

    तुझे भूल गया कभी याद नहीं करता तुझ को,जो बात बहुत पहले करनी थी अब की है। शहरयार

  • 27th Mar 2025

    तिरी दीद से आँखें!

    तिरी दीद से आँखें जी भर के सैराब हुईं,किस रोज़ हुआ था ऐसा बात ये कब की है। शहरयार

  • 27th Mar 2025

    सुनसान सड़क सन्नाटे!

    सुनसान सड़क सन्नाटे और लम्बे साए,ये सारी फ़ज़ा ऐ दिल तेरे मतलब की है। शहरयार

  • 27th Mar 2025

    आग मुट्ठी में दबी है!

    हाथ जल जाएगा छाला न कलेजे का छुओ,आग मुट्ठी में दबी है न समझना पानी| आरज़ू लखनवी

  • 27th Mar 2025

    बाबुल तुम बगिया के तरुवर!

    आज मैं हिंदी के श्रेष्ठ कवि स्वर्गीय गोपाल सिंह नेपाली जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ। नेपाली जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय गोपाल सिंह नेपाली जी की ये कविता- बाबुल तुम बगिया के तरुवर, हम तरुवर की चिड़ियाँ रेदाना चुगते उड़ जाएँ…

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