Skip to content

SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
    • Activity
    • Members
    • Sample Page
    • Sample Page
    • Sample Page
    • About
    • Contact
  • 13th Jan 2025

    सुना रही है फ़साने!

    सबा भी लाई न कोई पयाम अपनों का,सुना रही है फ़साने इधर उधर के मुझे| मजरूह सुल्तानपुरी

  • 13th Jan 2025

    उदास कर के मुझे !

    किसी ने भी तो न देखा निगाह भर के मुझे,गया फिर आज का दिन भी उदास कर के मुझे| मजरूह सुल्तानपुरी

  • 13th Jan 2025

    शाख़ फल तो सकती!

    हुई है गर्म लहु पी के इश्क़ की तलवार,यूँ ही जिलाए जा ये शाख़ फल तो सकती है| फ़िराक़ गोरखपुरी

  • 13th Jan 2025

    रह गया सब कुछ !

    आज मैं हिंदी के एक श्रेष्ठ कवि स्वर्गीय वीरेंद्र मिश्र जी का एक नवगीत शेयर कर रहा हूँ। इनकी कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है श्री स्वर्गीय वीरेंद्र मिश्र जी का यह नवगीत – रह गया सब कुछ बिखर करइन दिनों है दुख शिखर पर एक पल में हो…

  • 12th Jan 2025

    बात खल तो सकती है!

    जो तू ने तर्क-ए-मोहब्बत को अहल-ए-दिल से कहा, हज़ार नर्म हो ये बात खल तो सकती है| फ़िराक़ गोरखपुरी

  • 12th Jan 2025

    चाँदी पिघल तो!

    सुना है बर्फ़ के टुकड़े हैं दिल हसीनों के,कुछ आँच पा के ये चाँदी पिघल तो सकती है| फ़िराक़ गोरखपुरी

  • 12th Jan 2025

    दुनिया सँभल तो!

    तिरी निगाह सहारा न दे तो बात है और,कि गिरते गिरते भी दुनिया सँभल तो सकती है| फ़िराक़ गोरखपुरी

  • 12th Jan 2025

    वो मिल न सकेगी !

    कभी वो मिल न सकेगी मैं ये नहीं कहता,वो आँख आँख में पड़ कर बदल तो सकती है| फ़िराक़ गोरखपुरी

  • 12th Jan 2025

    ज़ंजीर गल तो सकती!

    ग़म-ए-ज़माना-ओ-सोज़-ए-निहाँ की आँच तो दे,अगर न टूटे ये ज़ंजीर गल तो सकती है| फ़िराक़ गोरखपुरी

  • 12th Jan 2025

    अज़ल से सोई है!

    अज़ल से सोई है तक़दीर-ए-इश्क़ मौत की नींद,अगर जगाइए करवट बदल तो सकती है| फ़िराक़ गोरखपुरी

←Previous Page
1 … 376 377 378 379 380 … 1,387
Next Page→

Blog at WordPress.com.

Privacy & Cookies: This site uses cookies. By continuing to use this website, you agree to their use.
To find out more, including how to control cookies, see here: Cookie Policy
  • Subscribe Subscribed
    • SamaySakshi
    • Join 1,143 other subscribers.
    • Already have a WordPress.com account? Log in now.
    • SamaySakshi
    • Subscribe Subscribed
    • Sign up
    • Log in
    • Report this content
    • View site in Reader
    • Manage subscriptions
    • Collapse this bar