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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 15th Jan 2025

    अजब क्या जो है!

    अजब क्या जो है बद-गुमाँ सब से वाइज़, बुरा सुनते सुनते बुरा कहते कहते| हसरत मोहानी

  • 15th Jan 2025

    माजरा कहते कहते!

    ख़बर उन को अब तक नहीं मर मिटे हम,दिल-ए-ज़ार का माजरा कहते कहते| हसरत मोहानी

  • 15th Jan 2025

    फ़साना तिरी याद का!

    शब-ए-ग़म किस आराम से सो गए हैं,फ़साना तिरी याद का कहते कहते| हसरत मोहानी

  • 15th Jan 2025

    बेवफ़ा कहते कहते!

    मिरा इश्क़ भी ख़ुद-ग़रज़ हो चला है,तिरे हुस्न को बेवफ़ा कहते कहते| हसरत मोहानी

  • 15th Jan 2025

    कि दिल रह गया!

    वो चुप हो गए मुझ से क्या कहते कहते,कि दिल रह गया मुद्दआ कहते कहते| हसरत मोहानी

  • 15th Jan 2025

    एक प्यार सब कुछ!

    आज मैं हिंदी नवगीत की श्रेष्ठ कवियित्री स्वर्गीय शांति सुमन जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ। इनकी कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयरकी हैं।                         लीजिए आज प्रस्तुत है श्री स्वर्गीय शांति सुमन जी का यह गीत  – मुझमें अपनापन बोता हैसांझ-सकारे यह मेरा घर उगते ही सूरज के-रोशनदान बांटते ढेर उजालेधूपों के परदे…

  • 14th Jan 2025

    मस्ती भरी नज़र से!

    होश-ओ-हवास पे मिरे बिजली सी गिर पड़ी, मस्ती भरी नज़र से पिला के चले गए| मजरूह सुल्तानपुरी

  • 14th Jan 2025

    वीरान मिरा दिल था!

    इस दिल से आ रही है किसी यार की सदा,वीरान मिरा दिल था बसाते चले गए| मजरूह सुल्तानपुरी

  • 14th Jan 2025

    बेताबियों को और!

    जो साँस आ रही है उसी का पयाम है,बेताबियों को और बढ़ाते चले गए| मजरूह सुल्तानपुरी

  • 14th Jan 2025

    दीवाना ज़िंदगी को!

    उन के ख़याल आए तो आते चले गए,दीवाना ज़िंदगी को बनाते चले गए| मजरूह सुल्तानपुरी

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