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कुछ अपने दिल की!
कुछ अपने दिल की ख़ू* का भी शुक्राना चाहिए,सौ बार उन की ख़ू का गिला कर चुके हैं हम|*Nature फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
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फीका है अब भी रंग!
उन की नज़र में क्या करें फीका है अब भी रंग,जितना लहू था सर्फ़-ए-क़बा कर चुके हैं हम| फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
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रहबर से अपनी राह!
अब अपना इख़्तियार है चाहे जहाँ चलें,रहबर से अपनी राह जुदा कर चुके हैं हम| फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
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ख़फ़ा कर चुके हैं हम!
देखें है कौन कौन ज़रूरत नहीं रही,कू-ए-सितम में सब को ख़फ़ा कर चुके हैं हम| फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
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चिंता मुक्ति!
होटल में रुके थे, काफी बडा होटल था, जहाँ तक याद है, काफी सारे रिश्तेदार आए थे, कोई शादी थी शायद। परिजन बाहर निकल गए, शायद शॉपिंग वगैरह के लिए, बाद में मैं भी होटल से बाहर निकला, होटल से कुछ बाहर आकर एक दुकान पर बैठ गए, कुछ खाने के लिए, बारात में आए…
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अब एहतियात की!
अब एहतियात की कोई सूरत नहीं रही,क़ातिल से रस्म-ओ-राह सिवा कर चुके हैं हम| फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
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पता कर चुके हैं हम!
कुछ इम्तिहान-ए-दस्त-ए-जफ़ा कर चुके हैं हम,कुछ उन की दस्तरस का पता कर चुके हैं हम| फ़ैज़ अहमद फ़ैज़