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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 22nd Dec 2025

    चाँदनी की पाँच परतें!

    आज एक बार फिर मैं हिंदी के श्रेष्ठ कवि स्वर्गीय सर्वेश्वर दयाल सक्सेना जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ। सर्वेश्वर जी की अनेक रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय सर्वेश्वर दयाल सक्सेना जी का यह नवगीत – चाँदनी की पाँच परतें,हर परत अज्ञात है । एक जल…

  • 21st Dec 2025

    सुख़न की शाख़ पे!

    ज़मीन बाँझ न हो जाए कुछ कहो ‘अज़हर’,सुख़न की शाख़ पे कब से समर नहीं आया| अज़हर इक़बाल

  • 21st Dec 2025

    हम अब भी दश्त में!

    हम अब भी दश्त में ख़ेमा लगाए बैठे हैं,हमारे हिस्से में अपना ही घर नहीं आया| अज़हर इक़बाल

  • 21st Dec 2025

    बस एक लम्हे को!

    बस एक लम्हे को बे-पैरहन उसे देखा,फिर इस के बाद मुझे कुछ नज़र नहीं आया| अज़हर इक़बाल

  • 21st Dec 2025

    दो रोज़ में वो प्यार का आलम!

    अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से मैं आज मुकेश जी का एक और गीत शेयर कर रहा हूँ- दो रोज़ में वो प्यार का आलम गुज़र गया आशा है आपको पसंद आएगा। धन्यवाद।

  • 21st Dec 2025

    बहुत दिनों से है!

    बहुत दिनों से है बे-शक्ल सी मेरी मिट्टी,बहुत दिनों से कोई कूज़ा-गर नहीं आया| अज़हर इक़बाल

  • 21st Dec 2025

    महानगर का गीत

    आज फिर से मेरा एक पुराना गीत प्रस्तुत है, आप सुधीजनों की सम्मति चाहूंगा- नींदों में जाग-जागकर, कर्ज़ सी चुका रहे उमर,सड़कों पर भाग-भागकर, लड़ते हैं व्यक्तिगत समर। छूटी जब हाथ से किताब, सारे संदर्भ खो गए,सीमाएं बांध दी गईं, हम शंटिंग ट्रेन हो गए,सूरज तो उगा ही नहीं, लाइन में लग गया शहर,लड़ने को…

  • 20th Dec 2025

    जो एक बार गया!

    बहुत अजीब है यारों बुलंदियों का तिलिस्म,जो एक बार गया लौट कर नहीं आया| अज़हर इक़बाल

  • 20th Dec 2025

    मिरी दुआओं में!

    वो माहताब अभी बाम पर नहीं आया,मिरी दुआओं में शायद असर नहीं आया| अज़हर इक़बाल

  • 20th Dec 2025

    तेरी जुस्तुजू में हम!

    बार-हा तेरी जुस्तुजू में हम,तुझ से मिलने के बाद भी तरसे| अज़हर इक़बाल

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