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चाँदनी की पाँच परतें!
आज एक बार फिर मैं हिंदी के श्रेष्ठ कवि स्वर्गीय सर्वेश्वर दयाल सक्सेना जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ। सर्वेश्वर जी की अनेक रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय सर्वेश्वर दयाल सक्सेना जी का यह नवगीत – चाँदनी की पाँच परतें,हर परत अज्ञात है । एक जल…
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सुख़न की शाख़ पे!
ज़मीन बाँझ न हो जाए कुछ कहो ‘अज़हर’,सुख़न की शाख़ पे कब से समर नहीं आया| अज़हर इक़बाल
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हम अब भी दश्त में!
हम अब भी दश्त में ख़ेमा लगाए बैठे हैं,हमारे हिस्से में अपना ही घर नहीं आया| अज़हर इक़बाल
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दो रोज़ में वो प्यार का आलम!
अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से मैं आज मुकेश जी का एक और गीत शेयर कर रहा हूँ- दो रोज़ में वो प्यार का आलम गुज़र गया आशा है आपको पसंद आएगा। धन्यवाद।
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बहुत दिनों से है!
बहुत दिनों से है बे-शक्ल सी मेरी मिट्टी,बहुत दिनों से कोई कूज़ा-गर नहीं आया| अज़हर इक़बाल
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महानगर का गीत
आज फिर से मेरा एक पुराना गीत प्रस्तुत है, आप सुधीजनों की सम्मति चाहूंगा- नींदों में जाग-जागकर, कर्ज़ सी चुका रहे उमर,सड़कों पर भाग-भागकर, लड़ते हैं व्यक्तिगत समर। छूटी जब हाथ से किताब, सारे संदर्भ खो गए,सीमाएं बांध दी गईं, हम शंटिंग ट्रेन हो गए,सूरज तो उगा ही नहीं, लाइन में लग गया शहर,लड़ने को…