-
यहाँ से तेरे मिरे रास्ते!
ये एक पेड़ है आ इस से मिल के रो लें हम,यहाँ से तेरे मिरे रास्ते बदलते हैं| बशीर बद्र
-
उठे बादल, झुके बादल!
आज मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि स्वर्गीय हरिनारायण व्यास जी का एक कविता शेयर कर रहा हूँ। इनकी रचनाएं अज्ञेय जी द्वारा संपादित दूसरा सप्तक में भी शामिल थीं। व्यास जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है श्री स्वर्गीय हरिनारायण व्यास जी की यह कविता – उधर उस नीम…
-
कई सितारों को मैं!
कई सितारों को मैं जानता हूँ बचपन से,कहीं भी जाऊँ मिरे साथ साथ चलते हैं| बशीर बद्र
-
घने धुएँ में फ़रिश्ते भी!
घने धुएँ में फ़रिश्ते भी आँख मलते हैं,तमाम रात खुजूरों के पेड़ जुलते हैं| बशीर बद्र
-
सीपियों में पलते हैं!
उदास आँखों से आँसू नहीं निकलते हैं,ये मोतियों की तरह सीपियों में पलते हैं| बशीर बद्र