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सारा जहान देखता है!
मिला है हुस्न तो इस हुस्न की हिफ़ाज़त कर,सँभल के चल तुझे सारा जहान देखता है| शकील आज़मी
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जो चाहो अब रंग भरो!
अब तुम सोचो अब तुम जानो जो चाहो अब रंग भरो,हम ने तो इक नक़्शा खींचा इक ख़ाका तय्यार किया| जाँ निसार अख़्तर
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क्या है मेरी बारी में!
आज मैं हिंदी गीत के शिखर पुरुष स्वर्गीय हरिवंशराय बच्चन जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ। बच्चन जी की अनेक रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय हरिवंशराय बच्चन जी का यह गीत – क्या है मेरी बारी में। जिसे सींचना था मधुजल सेसींचा खारे पानी से,नहीं उपजता…
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दिल का कारोबार!
इश्क़ में क्या नुक़सान नफ़ा है हम को क्या समझाते हो,हम ने सारी उम्र ही यारो दिल का कारोबार किया| जाँ निसार अख़्तर
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दौरे भी तन्हाई के!
हम पर कितनी बार पड़े ये दौरे भी तन्हाई के,जो भी हम से मिलने आया मिलने से इंकार किया| जाँ निसार अख़्तर
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आँखों को ख़ूँ-बार!
क़तरा क़तरा सिर्फ़ हुआ है इश्क़ में अपने दिल का लहू,शक्ल दिखाई तब उस ने जब आँखों को ख़ूँ-बार किया| जाँ निसार अख़्तर