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शारजाह लाइट विलेज
आज हम शारजाह लाइट फेस्टिवल देखने गए, वहाँ भ्रमण के दो चित्र और वहाँ से दुबई वापसी का एक चित्र शेयर कर रहा हूँ – अंतिम चित्र अल फुर्जान मैट्रो स्टेशन का है। ऊपर एक चित्र अल फुर्जान मेट्रो स्टेशन के अंदर का है और अंतिम चित्र घर के भीतर से रात्रि के समय लिया…
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मिले हैं यूँ तो बहुत!
मिले हैं यूँ तो बहुत आओ अब मिलें यूँ भी, कि रूह गर्मी-ए-अनफ़ास से पिघल जाए| उबैदुल्लाह अलीम
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अब इस क़दर भी न!
अज़ीज़ इतना ही रक्खो कि जी सँभल जाए,अब इस क़दर भी न चाहो कि दम निकल जाए| उबैदुल्लाह अलीम
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राजा के पोखर में!
आज मैं हिंदी के वरिष्ठ कवि श्री बुद्धिनाथ मिश्र जी का एक नवगीत शेयर कर रहा हूँ। मिश्र जी की अनेक रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है श्री बुद्धिनाथ मिश्र जी का यह नवगीत – ऊपर ऊपर लाल मछलियाँनीचे ग्राह बसे।राजा के पोखर में हैपानी की थाह किसे। जलकर राख…