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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 15th Feb 2025

    शारजाह लाइट विलेज

    आज हम शारजाह लाइट फेस्टिवल देखने गए, वहाँ भ्रमण के दो चित्र और वहाँ से दुबई वापसी का एक चित्र शेयर कर रहा हूँ – अंतिम चित्र अल फुर्जान मैट्रो स्टेशन का है। ऊपर एक चित्र अल फुर्जान मेट्रो स्टेशन के अंदर का है और अंतिम चित्र घर के भीतर से रात्रि के समय लिया…

  • 15th Feb 2025

    मिले हैं यूँ तो बहुत!

    मिले हैं यूँ तो बहुत आओ अब मिलें यूँ भी, कि रूह गर्मी-ए-अनफ़ास से पिघल जाए| उबैदुल्लाह अलीम

  • 15th Feb 2025

    अब इस क़दर भी न!

    अज़ीज़ इतना ही रक्खो कि जी सँभल जाए,अब इस क़दर भी न चाहो कि दम निकल जाए| उबैदुल्लाह अलीम

  • 14th Feb 2025

    बात बन गई दिल की!

    वो जो बिगड़े रक़ीब से ‘हसरत’,और भी बात बन गई दिल की| हसरत मोहानी

  • 14th Feb 2025

    आरज़ू तुम से!

    मर मिटे हम न हो सकी पूरी,आरज़ू तुम से एक भी दिल की| हसरत मोहानी

  • 14th Feb 2025

    आबरू कुछ तो!

    उन से कुछ तो मिला वो ग़म ही सही,आबरू कुछ तो रह गई दिल की| हसरत मोहानी

  • 14th Feb 2025

    बेकली हमने देख ली!

    चैन से महव-ए-ख़्वाब-ए-नाज़ में वो,बेकली हम ने देख ली दिल की| हसरत मोहानी

  • 14th Feb 2025

    जो नहीं जानते !

    मिल चुकी हम को उन से दाद-ए-वफ़ा,जो नहीं जानते लगी दिल की| हसरत मोहानी

  • 14th Feb 2025

    राजा के पोखर में!

    आज मैं हिंदी के वरिष्ठ कवि श्री बुद्धिनाथ मिश्र जी का एक नवगीत शेयर कर रहा हूँ। मिश्र जी की अनेक रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है श्री बुद्धिनाथ मिश्र जी का यह नवगीत – ऊपर ऊपर लाल मछलियाँनीचे ग्राह बसे।राजा के पोखर में हैपानी की थाह किसे। जलकर राख…

  • 13th Feb 2025

    बात रह गई दिल की!

    याद हर हाल में रहे वो मुझे, अल-ग़रज़ बात रह गई दिल की| हसरत मोहानी

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