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आज शाम है बहुत उदास!
आज मैं हिंदी के वरिष्ठ साहित्यकार एवं कवि स्वर्गीय भगवतीचरण वर्मा जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ। इनकी अधिक रचनाएं मैंने पहले शेयर नहीं की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय भगवतीचरण वर्मा जी की यह कविता – आज शाम है बहुत उदासकेवल मैं हूँ अपने पास । दूर कहीं पर हास-विलासदूर कहीं…
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आरज़ू यही हसरत!
हर एक लहज़ा यही आरज़ू यही हसरत,जो आग दिल में है वो शेर में भी ढल जाए| उबैदुल्लाह अलीम
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तन्हाइयों में जल जाए!
मैं वो चराग़ सर-ए-रहगुज़ार-ए-दुनिया हूँ,जो अपनी ज़ात की तन्हाइयों में जल जाए| उबैदुल्लाह अलीम
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कि जाने कौन कहाँ!
मोहब्बतों में अजब है दिलों को धड़का सा,कि जाने कौन कहाँ रास्ता बदल जाए| उबैदुल्लाह अलीम