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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 2nd May 2025

    चराग़ याद का!

    गली के मोड़ से घर तक अँधेरा क्यूँ है ‘निज़ाम’,चराग़ याद का उस ने बुझा दिया होगा| शीन काफ़ निज़ाम

  • 2nd May 2025

    भले आदमी!

    आज मैं हिंदी के अनूठे कवि स्वर्गीय भवानी प्रसाद मिश्र जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ। भवानी दादा की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय भवानी प्रसाद मिश्र जी की यह कविता – भले आदमीरुक रहने का पलअभी नहीं आया बीज जिस फल के लिएतूने…

  • 1st May 2025

    चुभन ये पीठ में कैसी!

    चुभन ये पीठ में कैसी है मुड़ के देख तो ले, कहीं कोई तुझे पीछे से देखता होगा| शीन काफ़ निज़ाम

  • 1st May 2025

    पुराने वक़्तों का है!

    पुराने वक़्तों का है क़स्र* ज़िंदगी मेरी,तुम्हारा नाम भी इस में कहीं लिखा होगा| *किला शीन काफ़ निज़ाम

  • 1st May 2025

    वही न मिलने का ग़म !

    वही न मिलने का ग़म और वही गिला होगा,मैं जानता हूँ मुझे उस ने क्या लिखा होगा| शीन काफ़ निज़ाम

  • 1st May 2025

    लड़की सियानी और!

    बस इसी एहसास की शिद्दत ने बूढ़ा कर दिया,टूटे-फूटे घर में इक लड़की सियानी और है| मुनव्वर राना

  • 1st May 2025

    फिर वही उक्ताहटें!

    फिर वही उक्ताहटें होंगी बदन चौपाल में,उम्र के क़िस्से में थोड़ी सी जवानी और है| मुनव्वर राना

  • 1st May 2025

    ख़ुश्क पत्ते आँख में!

    ख़ुश्क पत्ते आँख में चुभते हैं काँटों की तरह,दश्त में फिरना अलग है बाग़बानी और है| मुनव्वर राना

  • 1st May 2025

    ख़ामुशी कब चीख़!

    ख़ामुशी कब चीख़ बन जाए किसे मालूम है,ज़ुल्म कर लो जब तलक ये बे-ज़बानी और है| मुनव्वर राना

  • 1st May 2025

    थोड़ा सा पानी और है!

    हाँ इजाज़त है अगर कोई कहानी और है,इन कटोरों में अभी थोड़ा सा पानी और है| मुनव्वर राना

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