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चुप रहिए तो बर्बादी!
क्या तेरा मुदावा हो दर्द-ए-शब-ए-तन्हाई,चुप रहिए तो बर्बादी कहिए तो गिला होगा| हफ़ीज़ बनारसी
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क्या वह नहीं होगा!
आज मैं हिंदी के श्रेष्ठ कवि तथा स्वर्गीय कुंवर नारायण जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ। कुंवर नारायण जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय कुंवर नारायण जी की यह कविता – क्या फिर वही होगाजिसका हमें डर है ?क्या वह नहीं होगाजिसकी हमें आशा…
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कुछ सोच के परवाना!
कुछ सोच के परवाना महफ़िल में जला होगा,शायद इसी मरने में जीने का मज़ा होगा| हफ़ीज़ बनारसी
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अपने गुलिस्ताँ को!
सहरा से बहारों को ले आए चमन वाले,और अपने गुलिस्ताँ को आबाद नहीं करते| फ़ना निज़ामी कानपुरी
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फ़रियाद नहीं करते!
कुछ दर्द की शिद्दत है कुछ पास-ए-मोहब्बत है,हम आह तो करते हैं फ़रियाद नहीं करते| फ़ना निज़ामी कानपुरी
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इमदाद नहीं करते!
साहिल के तमाशाई हर डूबने वाले पर,अफ़सोस तो करते हैं इमदाद नहीं करते| फ़ना निज़ामी कानपुरी
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हम याद नहीं करते!
दुनिया-ए-तसव्वुर हम आबाद नहीं करते,याद आते हो तुम ख़ुद ही हम याद नहीं करते| फ़ना निज़ामी कानपुरी
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जहाँ से किनारा करो!
काम आए न मुश्किल में कोई यहाँ मतलबी दोस्त हैं मतलबी यार हैं,इस जहाँ में नहीं कोई अहल-ए-वफ़ा ऐ ‘फ़ना’ इस जहाँ से किनारा करो| फ़ना निज़ामी कानपुरी
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जिंदगी अपनी नहीं रही!
आज मैं हिंदी नवगीत के श्रेष्ठ कवि तथा मेरे लिए गुरुतुल्य रहे स्वर्गीय डॉक्टर कुंवर बेचैन जी का एक नवगीत शेयर कर रहा हूँ। बेचैन जी की अनेक रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय कुंवर बेचैन जी का यह नवगीत – दिवस खरीदे मजदूरी नेमजबूरी ने रातशाम हुई नीलाम…