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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 5th May 2025

    चाँद तारे फिजूल थे!

    तुझसे मिलकर हुए हैं पुरमानी,चाँद तारे फिजूल थे पहले। सूर्यभानु गुप्त

  • 5th May 2025

    अब जो पत्थर हैं!

    दिल लगाने की भूल थे पहले,अब जो पत्थर हैं फूल थे पहले। सूर्यभानु गुप्त

  • 5th May 2025

    जागना अपराध!

    आज मैं हिंदी के श्रेष्ठ कवि स्वर्गीय माखन लाल चतुर्वेदी जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ। इनकी कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय माखन लाल चतुर्वेदी जी की यह कविता – जागना अपराध!इस विजन-वन गोद में सखि,मुक्ति-बन्धन-मोद में सखि,विष-प्रहार-प्रमोद में सखि, मृदुल भावोंस्नेह दावोंअश्रु के अगणित…

  • 4th May 2025

    अँगूठे-सा दंग हूँ!

    ये किसका दस्तख़त है, बताए कोई मुझे,मैं अपना नाम लिख के अँगूठे-सा दंग हूँ। सूर्यभानु गुप्त

  • 4th May 2025

    अटकी पतंग हूँ!

    माँझा कोई यक़ीन के क़ाबिल नहीं रहा,तनहाइयों के पेड़ से अटकी पतंग हूँ। सूर्यभानु गुप्त

  • 4th May 2025

    निकला हूँ इक नदी सा

    निकला हूँ इक नदी-सा समन्दर को ढूँढ़ने,कुछ दूर कश्तियों के अभी संग-संग हूँ। सूर्यभानु गुप्त

  • 4th May 2025

    अँधेरी सुरंग हूँ!

    रिश्ते गुज़र रहे हैं लिए दिन में बत्तियाँ,मैं बीसवीं सदी की अँधेरी सुरंग हूँ। सूर्यभानु गुप्त

  • 4th May 2025

    मोहरा सियासतों का!

    मोहरा सियासतों का, मेरा नाम आदमी,मेरा वुजूद क्या है, ख़लाओं की जंग हूँ। सूर्यभानु गुप्त

  • 4th May 2025

    हर लम्हा ज़िन्दगी के!

    हर लम्हा ज़िन्दगी के पसीने से तंग हूँ,मैं भी किसी क़मीज़ के कॉलर का रंग हूँ। सूर्यभानु गुप्त

  • 4th May 2025

    दरिया हूँ और प्यासा!

    अपनी लहर है अपना रोग,दरिया हूँ और प्यासा हूँ| नासिर काज़मी

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