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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 11th May 2025

    आने वाले हैं शिकारी मेरे गाँव में!

    आज मैं हिंदी के श्रेष्ठ गीतकार स्वर्गीय राजेंद्र राजन जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ। इनकी अधिक रचनाएं मैंने पहले शेयर नहीं की है। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय राजेंद्र राजन जी का यह गीत – आने वाले हैं शिकारी मेरे गाँव मेंजनता है चिन्ता की मारी मेरे गाँव में फिर वही चौराहे…

  • 10th May 2025

    आख़िरी है सफ़र!

    आख़िरी है सफ़र वो सुबुक-सर चले,उस के दामन से अपने सितारे उठा| कृष्ण बिहारी नूर

  • 10th May 2025

    रौशनी का वो कैसा!

    रौशनी का वो कैसा अजब शोर था,इस किनारे हुआ उस किनारे उठा| कृष्ण बिहारी नूर

  • 10th May 2025

    अपनी पलकों से!

    अपनी पलकों से उस के इशारे उठा,ओस की उँगलियों से शरारे उठा| कृष्ण बिहारी नूर

  • 10th May 2025

    जी तो कहता है कि!

    जी तो कहता है कि बिस्तर से न उतरूँ कई रोज़,घर में सामान तो हो बैठ के खाने के लिए| शकील जमाली

  • 10th May 2025

    दूकान चलाने के लिए!

    नफ़रतें बेचने वालों की भी मजबूरी है, माल तो चाहिए दूकान चलाने के लिए| शकील जमाली

  • 10th May 2025

    मैं उसे ढूँढ रहा हूँ!

    हो गई है मिरी उजड़ी हुई दुनिया आबाद,मैं उसे ढूँढ रहा हूँ ये बताने के लिए| शकील जमाली

  • 10th May 2025

    आदमी धुएं के हैं!

    आज मैं हिंदी के श्रेष्ठ कवि स्वर्गीय राजेंद्र प्रसाद सिंह जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ। इनकी अधिक रचनाएं मैंने पहले शेयर नहीं की है। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय राजेंद्र प्रसाद सिंह जी की यह कविता – ताँबे का आसमान,टिन के सितारे,गैसीला अन्धकार,उड़ते हैं कसकुट के पंछी बेचारे,लोहे की धरती परचाँदी की…

  • 9th May 2025

    मैं ने हाथों से बुझाई!

    मैं ने हाथों से बुझाई है दहकती हुई आग,अपने बच्चे के खिलौने को बचाने के लिए| शकील जमाली

  • 9th May 2025

    कौन सा शहर!

    किन ज़मीनों पे उतारोगे अब इमदाद का क़हर,कौन सा शहर उजाड़ोगे बसाने के लिए| शकील जमाली

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