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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 7th Mar 2025

    सत्य तो बहुत मिले!   

    आज मैं हिंदी साहित्य के विराट व्यक्तित्व स्वर्गीय सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन अज्ञेय जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ। अज्ञेय जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं।                   लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन अज्ञेय जी की यह कविता  – खोज़ में जब निकल ही आयासत्य तो बहुत मिले ।…

  • 6th Mar 2025

    छोड़ आया पीछे!

    कितना आसाँ लग रहा है मुझ को आगे का सफ़र,छोड़ आया पीछे परछाईं को डरने के लिए| शहरयार

  • 6th Mar 2025

    यूँही आ निकला था!

    ये जगह हैरत-सराए है कहाँ थी ये ख़बर,यूँही आ निकला था मैं तो सैर करने के लिए| शहरयार

  • 6th Mar 2025

    रंग क्या कोई बचा है!

    अब ज़मीं क्यूँ तेरे नक़्शे से नहीं हटती नज़र,रंग क्या कोई बचा है इस में भरने के लिए| शहरयार

  • 6th Mar 2025

    चाँद से जब भी कहा!

    इस बुलंदी ख़ौफ़ से आज़ाद हो उस ने कहा,चाँद से जब भी कहा नीचे उतरने के लिए| शहरयार

  • 6th Mar 2025

    मैं ने सब तय्यारियाँ!

    आसमाँ कुछ भी नहीं अब तेरे करने के लिए,मैं ने सब तय्यारियाँ कर ली हैं मरने के लिए| शहरयार

  • 6th Mar 2025

    शेरों में जो ख़ूबी है!

    कहते हैं मिरे हक़ में सुख़न-फ़हम बस इतना,शेरों में जो ख़ूबी है मुआ’नी* से नहीं है|*SecondMeaning शहरयार

  • 6th Mar 2025

    दोहराता नहीं मैं भी!

    दोहराता नहीं मैं भी गए लोगों की बातें,इस दौर को निस्बत भी कहानी से नहीं है| शहरयार

  • 6th Mar 2025

    फ़ुर्सत जिन्हें अब!

    कल यूँ था कि ये क़ैद-ए-ज़मानी से थे बेज़ार,फ़ुर्सत जिन्हें अब सैर-ए-मकानी से नहीं है| शहरयार

  • 6th Mar 2025

    रिश्ता मिरी प्यास का!

    शिकवा कोई दरिया की रवानी से नहीं है,रिश्ता ही मिरी प्यास का पानी से नहीं है| शहरयार

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