Skip to content

SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
    • Activity
    • Members
    • Sample Page
    • Sample Page
    • Sample Page
    • About
    • Contact
  • 16th Mar 2025

    जाने का उस के रंज!

    उस आख़िरी नज़र में अजब दर्द था ‘मुनीर’,जाने का उस के रंज मुझे उम्र भर रहा| मुनीर नियाज़ी

  • 16th Mar 2025

    यही दिल में डर रहा!

    ख़ौफ़ आसमाँ के साथ था सर पर झुका हुआ,कोई है भी या नहीं है यही दिल में डर रहा| मुनीर नियाज़ी

  • 16th Mar 2025

    दूरी का ये तिलिस्म!

    गुज़री है क्या मज़े से ख़यालों में ज़िंदगी,दूरी का ये तिलिस्म बड़ा कारगर रहा| मुनीर नियाज़ी

  • 16th Mar 2025

    हरिजन टोली!   

    आज मैं हिंदी के श्रेष्ठ कवि कुमारेंद्र पारसनाथ सिंह जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ। इनकी अधिक रचनाएं मैंने पहले शेयर नहीं की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है कुमारेंद्र पारसनाथ सिंह जी की यह कविता – हरिजन टोली में शाम बिना कहे हो जाती है ।पूरनमासी हो या अमावसरात के व्यवहार में कोई…

  • 15th Mar 2025

    मेरी सदा हवा में!

    मेरी सदा हवा में बहुत दूर तक गई, पर मैं बुला रहा था जिसे बे-ख़बर रहा| मुनीर नियाज़ी

  • 15th Mar 2025

    सुब्ह-ए-सफ़र की!

    सुब्ह-ए-सफ़र की रात थी तारे थे और हवा,साया सा एक देर तलक बाम पर रहा| मुनीर नियाज़ी

  • 15th Mar 2025

    अब भी पयाम आते हैं!

    छिन गए हम से जो हालात की राहों में ‘क़तील’,उन हसीनों के हमें अब भी पयाम आते हैं| क़तील शिफ़ाई

  • 15th Mar 2025

    याद अक्सर वो हमें!

    हम पे हो जाएँ न कुछ और भी रातें भारी,याद अक्सर वो हमें अब सर-ए-शाम आते हैं| क़तील शिफ़ाई

  • 15th Mar 2025

    हम तड़पते हैं तो!

    हम न चाहें तो कभी शाम के साए न ढलें,हम तड़पते हैं तो सुब्हों के सलाम आते हैं| क़तील शिफ़ाई

  • 15th Mar 2025

    ज़िंदगी बन के वो!

    ज़िंदगी बन के वो चलते हैं मिरी साँस के साथ, उन को ऐसे कई अंदाज़-ए-ख़िराम आते हैं| क़तील शिफ़ाई

←Previous Page
1 … 323 324 325 326 327 … 1,385
Next Page→

Blog at WordPress.com.

Privacy & Cookies: This site uses cookies. By continuing to use this website, you agree to their use.
To find out more, including how to control cookies, see here: Cookie Policy
  • Subscribe Subscribed
    • SamaySakshi
    • Join 1,143 other subscribers.
    • Already have a WordPress.com account? Log in now.
    • SamaySakshi
    • Subscribe Subscribed
    • Sign up
    • Log in
    • Report this content
    • View site in Reader
    • Manage subscriptions
    • Collapse this bar