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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 22nd Mar 2025

    दिल की गली में चाँद!

    दिल की गली में चाँद निकलता रहता है,एक दिया उम्मीद का जलता रहता है| अज़हर इक़बाल

  • 22nd Mar 2025

    रूपांतर!

    आज मैं हिंदी के श्रेष्ठ कथाकार एवं कवि स्वर्गीय गंगा प्रसाद विमल जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ। विमल जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय गंगा प्रसाद विमल जी की यह कविता – रूपांतरइतिहासगाथाएंझूठ हैं सबसच है एक पेडजब तक वह फल देता है…

  • 21st Mar 2025

    दूर की सदा क्या है!

    उदास रात की ख़ामोशियों में ऐ ‘क़ैसर‘, क़रीब आती हुई दूर की सदा क्या है| क़ैसर शमीम

  • 21st Mar 2025

    धुआँ नहीं न सही!

    धुआँ नहीं न सही आग तो नज़र आए,यूँ चुपके चुपके सुलगने से फ़ाएदा क्या है| क़ैसर शमीम

  • 21st Mar 2025

    सवाल सा क्या है!

    तुझे पसंद कहाँ हाल पूछना मेरा,तिरी निगाह में लेकिन सवाल सा क्या है| क़ैसर शमीम

  • 21st Mar 2025

    रहेगी धूप मिरे सर पे!

    रहेगी धूप मिरे सर पे आख़िरी दिन तक,जवाँ है पेड़ मगर उस का आसरा क्या है| क़ैसर शमीम

  • 21st Mar 2025

    हर एक साँस की धार!

    अभी तो काट रही है हर एक साँस की धार,अज़ल जब आए तो देखूँ कि इंतिहा क्या है| क़ैसर शमीम

  • 21st Mar 2025

    भूली-बिसरी तस्वीरें!

    नज़र की धुँद में हैं भूली-बिसरी तस्वीरें,पलट के देखने वाले ये देखना क्या है| क़ैसर शमीम

  • 21st Mar 2025

    धूल के सिवा क्या है!

    शिकस्ता ख़्वाब के मलबे में ढूँढता क्या है,खंडर खंडर है यहाँ धूल के सिवा क्या है| क़ैसर शमीम

  • 21st Mar 2025

    बरसों के बाद कभी!

    आज मैं हिंदी के श्रेष्ठ कवि स्वर्गीय गिरिजाकुमार माथुर जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ। इनकी रचनाएं अज्ञेय जी द्वारा संपादित ‘तारसप्तक’ में सम्मिलित की गई थीं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय गिरिजाकुमार माथुर जी की यह कविता – बरसों के बाद कभीहम तुम यदि मिलें कहीं,देखें कुछ परिचित से,लेकिन पहिचानें ना। याद…

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