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इश्क़ में कितना नाम!
मुझ गुमनाम से पूछते हैं फ़रहाद ओ मजनूँ,इश्क़ में कितना नाम कमाया जा सकता है| अब्बास ताबिश
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पानी आँख में भर कर!
पानी आँख में भर कर लाया जा सकता है,अब भी जलता शहर बचाया जा सकता है| अब्बास ताबिश
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जो मुझको किसी और!
वो कौन है उस से तो मैं वाक़िफ़ भी नहीं हूँ,जो मुझ को किसी और का होने नहीं देता| अब्बास ताबिश
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मैं आप उठाता हूँ !
मैं आप उठाता हूँ शब-ओ-रोज़ की ज़िल्लत,ये बोझ किसी और को ढोने नहीं देता| अब्बास ताबिश
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बच्चा तो कभी अपने!
तुम माँग रहे हो मिरे दिल से मिरी ख़्वाहिश,बच्चा तो कभी अपने खिलौने नहीं देता| अब्बास ताबिश
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हँसने नहीं देता कभी!
हँसने नहीं देता कभी रोने नहीं देता,ये दिल तो कोई काम भी होने नहीं देता| अब्बास ताबिश
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ठहराव!
आज मैं हिंदी के श्रेष्ठ कवि श्री गिरधर राठी जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ। राठी जी की अधिक कविताएं मैंने पहले शेयर नहीं की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है श्री गिरधर राठी जी की ये कविता- बार-बार देखने लगता था पीछेउधर उस छोर पर घिसटता आता था सचइस के और उस के…