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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 19th Sep 2025

    किन शिकस्तों के!

    किन शिकस्तों के शब-ओ-रोज़ से गुज़रा होगा,वो मुसव्विर जो हर इक नक़्श अधूरा रक्खे| वसीम बरेलवी

  • 19th Sep 2025

    ज़िंदगी तुझ पे अब!

    ज़िंदगी तुझ पे अब इल्ज़ाम कोई क्या रक्खे,अपना एहसास ही ऐसा है जो तन्हा रक्खे| वसीम बरेलवी

  • 19th Sep 2025

    उसे कहीं से बुलाओ!

    ग़ज़ल में जिस की हमेशा चराग़ जलते हैं,उसे कहीं से बुलाओ बड़ा अँधेरा है| बशीर बद्र

  • 19th Sep 2025

    गीत- इंद्रधनुष सपनों को!

    आज अपने एक और गीत का वीडिओ अपनी आवाज में अपलोड कर रहा हूँ, बेरोज़गारी के दिनों का गीत है ये- https://photos.app.goo.gl/mFhWvrmdaZwQDX3r9 इंद्रधनुष सपनों को पथरीले अनुभव की ताक पर धरें,आओ हम तुम मिलकर, रोज़गार दफ्तर की फाइलें भरें। आप सभी की सम्मति और स्नेह चाहूंगा।

  • 19th Sep 2025

    ग़ज़ल के जाम!

    किताबें कैसी उठा लाए मय-कदे वाले,ग़ज़ल के जाम उठाओ बड़ा अँधेरा है| बशीर बद्र

  • 19th Sep 2025

    मुस्कुराते बैठे रहते हो- रवींद्रनाथ ठाकुर

    आज फिर से पुरानी ब्लॉग पोस्ट को दोहराने का दिन है, लीजिए प्रस्तुत है यह पोस्ट|आज, मैं फिर से भारत के नोबल पुरस्कार विजेता कवि गुरुदेव रवींद्र नाथ ठाकुर की एक और कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह उनकी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित जिस कविता का भावानुवाद है, उसे अनुवाद के बाद प्रस्तुत…

  • 18th Sep 2025

    कोई कहानी सुनाओ!

    हक़ीक़तों में ज़माना बहुत गुज़ार चुके,कोई कहानी सुनाओ बड़ा अँधेरा है| बशीर बद्र

  • 18th Sep 2025

    कोई सितारा नहीं!

    कोई सितारा नहीं पत्थरों की पलकों पर,कोई चराग़ जलाओ बड़ा अँधेरा है| बशीर बद्र

  • 18th Sep 2025

    अब आँसुओं से!

    उदास कर गए बे-साख़्ता लतीफ़े भी,अब आँसुओं से रुलाओ बड़ा अँधेरा है| बशीर बद्र

  • 18th Sep 2025

    हमारे पास तो आओ!

    हमारे पास तो आओ बड़ा अंधेरा है,कहीं न छोड़ के जाओ बड़ा अंधेरा है| बशीर बद्र

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