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उसे कहीं से बुलाओ!
ग़ज़ल में जिस की हमेशा चराग़ जलते हैं,उसे कहीं से बुलाओ बड़ा अँधेरा है| बशीर बद्र
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गीत- इंद्रधनुष सपनों को!
आज अपने एक और गीत का वीडिओ अपनी आवाज में अपलोड कर रहा हूँ, बेरोज़गारी के दिनों का गीत है ये- https://photos.app.goo.gl/mFhWvrmdaZwQDX3r9 इंद्रधनुष सपनों को पथरीले अनुभव की ताक पर धरें,आओ हम तुम मिलकर, रोज़गार दफ्तर की फाइलें भरें। आप सभी की सम्मति और स्नेह चाहूंगा।
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मुस्कुराते बैठे रहते हो- रवींद्रनाथ ठाकुर
आज फिर से पुरानी ब्लॉग पोस्ट को दोहराने का दिन है, लीजिए प्रस्तुत है यह पोस्ट|आज, मैं फिर से भारत के नोबल पुरस्कार विजेता कवि गुरुदेव रवींद्र नाथ ठाकुर की एक और कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह उनकी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित जिस कविता का भावानुवाद है, उसे अनुवाद के बाद प्रस्तुत…